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AI पर फोकस रहा तो भारत की GDP में 10% वृद्धि संभव, यूनीफोर CEO से खास बातचीत

यूनिफोर CEO का मानना है कि 2026 AI अपनाने का निर्णायक वर्ष होगा।

पेरिस में AI एक्शन समिट में शामिल हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। / IANS

अगले सप्ताह नई दिल्ली में होने वाले India AI Impact Summit से पहले यूनफोर के सह संस्थापक और सीईओ उमेश सचदेव ने कहा है कि यदि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मजबूती से अपनाता है तो अगले दो वर्षों में उसकी GDP वृद्धि 10 प्रतिशत के पार जा सकती है।

आईएएनएस से विशेष बातचीत में सचदेव ने कहा कि भारत AI अपनाने और उसके व्यावहारिक उपयोग (AI adoption and application) में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में है।

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AI रोलआउट का निर्णायक दौर
सचदेव ने कहा कि दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां दो बड़े रुझान साफ दिखाई दे रहे हैं—पहला, इकोसिस्टम और वैश्विक गठबंधनों का दौर, क्योंकि अब “वन साइज फिट्स ऑल” मॉडल कारगर नहीं रहेगा और देशों व कंपनियों को AI मॉडल, एप्लिकेशन और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारियां बनानी होंगी। दूसरा, AI अपनाने की रफ्तार में तेज बढ़ोतरी, जहां अमेरिका और चीन कोर तकनीकों में आगे हैं, लेकिन बड़े पैमाने पर AI adoption और उसके व्यावहारिक उपयोग में भारत सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभर सकता है। उनके अनुसार 1.4 अरब की आबादी के साथ भारत के पास AI अपनाने में वैश्विक नेतृत्व हासिल करने का अभूतपूर्व अवसर है।

प्रतिभा में भारत की बढ़त
सचदेव ने कहा कि भारत की ताकत सिर्फ संख्या में नहीं, बल्कि नेतृत्व में भी है। दुनिया की प्रमुख AI कंपनियों में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के नेता कार्यरत हैं। उनके अनुसार, 2026 AI के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है और यह कंपनियों व देशों के आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन बनेगा।

उन्होंने कहा, “अगर भारत AI अपनाने पर मजबूत फोकस बनाए रखता है, तो अगले 24 महीनों में 10 प्रतिशत से अधिक GDP वृद्धि संभव है।” उन्होंने यह भी कहा कि AI आधारित उत्पादकता बढ़ने से अमेरिका की GDP भी 6–7% तक पहुंच सकती है। सचदेव के मुताबिक, एजेंट AI और जेनरेटिव AI के कारण पिछले 25–30 वर्षों से ठहरी वैश्विक उत्पादकता में बड़ा बदलाव आने वाला है।

रोजगार पर असर?
AI से नौकरियां खत्म होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि इससे नए रोजगार सृजित होंगे। सरकारी सेवाओं में AI एजेंट्स फॉर्म भरने, कानूनी और मेडिकल सेवाओं तक पहुंच आसान बनाने जैसे कामों में लागत घटा सकते हैं, जिससे नागरिकों को बड़ा लाभ होगा।

चुनौती
हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि भू-राजनीतिक तनाव और नियामकीय प्रतिबंध नई चुनौतियां हैं। “Sovereign AI” का ट्रेंड तेजी से उभर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अत्यधिक नियमन से “हैव्स और हैव-नॉट्स” के बीच खाई बढ़ सकती है।

भारत की रणनीतिक बढ़त
भारत पहले ही डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे आधार के जरिए वैश्विक पहचान बना चुका है। आगामी India AI Impact Summit में नीति दिशा, उद्योग साझेदारी और प्रतिभा क्षमता को प्रदर्शित किया जाएगा।

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