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भारत के किसानों पर मंडरा रहा नया खतरा? अमेरिका-बांग्लादेश ट्रेड डील से बढ़ी चिंता

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि तत्काल किसी बड़े आयात उछाल की संभावना नहीं है और सुरक्षा उपाय मौजूद हैं। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि असर धीरे-धीरे कीमतों और आपूर्ति पैटर्न के जरिए दिखेगा।

भारतीय किसान / pexels

9 फरवरी को अमेरिका और बांग्लादेश के बीच हस्ताक्षरित “Agreement Between the United States of America and the People’s Republic of Bangladesh on Reciprocal Trade” अब भारत के कृषि क्षेत्र में चर्चा और चिंता का विषय बन गया है। भले ही यह समझौता औपचारिक रूप से द्विपक्षीय है, लेकिन भारतीय किसान संगठनों और व्यापार विशेषज्ञों को आशंका है कि इसका अप्रत्यक्ष असर भारत के कृषि बाजारों पर पड़ सकता है।

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क्या है समझौते का असर?
इस समझौते के तहत अमेरिका को बांग्लादेश के 17.5 करोड़ उपभोक्ताओं वाले बाजार में कृषि उत्पादों—जैसे गेहूं, सोयाबीन, सोया तेल, डेयरी उत्पाद, पोल्ट्री और कपास—के निर्यात में आसान पहुंच मिलेगी। बांग्लादेश ने अमेरिकी सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी (SPS) प्रमाणन को मान्यता देने और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने पर सहमति दी है। यहीं से भारत की चिंता शुरू होती है।

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