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भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर ब्रसेल्स में पीयूष गोयल की अहम वार्ता

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, “इस संवाद के दौरान प्रस्तावित समझौते के प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल / courtesy Commerce Minister Piyush Goyal X handle

भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को ब्रसेल्स में यूरोपीय संघ (EU) के ट्रेड और इकनॉमिक सिक्योरिटी कमिश्नर मारोस सेफकोविच के साथ उच्चस्तरीय बातचीत की। यह वार्ता भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को अंतिम रूप देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का हिस्सा है।

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, “इस संवाद के दौरान प्रस्तावित समझौते के प्रमुख मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। हमने नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था और आधुनिक आर्थिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जो किसानों और MSME क्षेत्र के हितों की रक्षा करते हुए भारतीय उद्योगों को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ती है।”

भारत इस समझौते के तहत श्रम-प्रधान क्षेत्रों—जैसे कपड़ा, चमड़ा, परिधान, रत्न-आभूषण और हस्तशिल्प—के लिए शून्य शुल्क (जीरो ड्यूटी) पहुंच की मांग कर रहा है।

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ब्रसेल्स में गोयल की यात्रा भारत और यूरोपीय संघ के बीच बढ़ते कूटनीतिक और तकनीकी संवाद को रेखांकित करती है। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य बातचीत कर रही टीमों को रणनीतिक दिशा देना, लंबित मुद्दों का समाधान करना और एक संतुलित व महत्वाकांक्षी समझौते को जल्द अंतिम रूप देना है।

यह मंत्रीस्तरीय बैठक ब्रसेल्स में एक सप्ताह तक चली गहन चर्चाओं के बाद हुई है। इससे पहले इसी सप्ताह भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और यूरोपीय आयोग की ट्रेड महानिदेशक सबीन वेयंड के बीच उच्चस्तरीय वार्ता हुई थी, जिसने आगे की बातचीत की नींव रखी।

भारत-ईयू आर्थिक संबंधों के लिहाज से यह दौर ऐतिहासिक माना जा रहा है। करीब नौ साल के अंतराल के बाद जून 2022 में इन वार्ताओं को दोबारा शुरू किया गया था, जो आर्थिक एकीकरण को गहरा करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। तब से अब तक दोनों पक्ष 14 दौर की गहन बातचीत और कई मंत्रीस्तरीय संवाद कर चुके हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार, पिछली उच्चस्तरीय बातचीत दिसंबर 2025 में हुई थी।

भारत और यूरोपीय संघ दोनों ने एक व्यापक समझौता करने की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति जताई है। आने वाली बातचीत में भी नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था और ऐसी आधुनिक आर्थिक साझेदारी पर जोर रहने की उम्मीद है, जो किसानों और MSMEs के हितों की रक्षा के साथ-साथ भारतीय उद्योगों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती से जोड़ सके।

यूरोपीय संघ इस समय भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और प्रमुख निवेशक है। वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच वस्तुओं के द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रस्तावित FTA को केवल एक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि आधुनिक आर्थिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही एक व्यापक साझेदारी के रूप में देखा जा रहा है।

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