ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

उंगलियां चटकाना सेहत के लिए सही या गलत? जानें क्या कहता है विज्ञान

अगर आयुर्वेद के अनुसार इसे समझे, तो आयुर्वेद शरीर को वात, पित्त और कफ इन तीन दोषों से जोड़कर देखता है।

एआई तस्वीर। / AI

अगर कोई बच्चा या बड़ा बार-बार उंगलियां चटकाता है, तो अक्सर यही सुनने को मिलता है कि उंगलियां चटकाने से जोड़ों में दर्द होने लगता है, हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, और आगे चलकर गठिया जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। सालों से यह बात लोगों के मन में बैठ चुकी है कि उंगलियां चटकाना एक गलत और नुकसानदायक आदत है, लेकिन इस पर वैज्ञानिक शोध का अलग मानना है। 

विज्ञान के अनुसार, जब हम उंगलियां मोड़ते या खींचते हैं, तो हमारे जोड़ों के बीच मौजूद एक खास तरल पदार्थ में हलचल होती है। इस तरल को साइनोवियल फ्लूइड कहा जाता है। यही फ्लूइड हमारे जोड़ों को चिकनाई देता है, ताकि वे आसानी से हिल-डुल सकें। जब उंगलियां चटकाई जाती हैं, तो इसी फ्लूइड में बने छोटे-छोटे गैस के बुलबुले अचानक फूटते हैं, जिससे चटकने की आवाज सुनाई देती है, यानी यह आवाज हड्डियों के टूटने या जोड़ों के खराब होने की नहीं होती।

अगर आयुर्वेद के अनुसार इसे समझे, तो आयुर्वेद शरीर को वात, पित्त और कफ इन तीन दोषों से जोड़कर देखता है। उंगलियों और जोड़ों का संबंध वात दोष से माना जाता है। अगर वात संतुलित है, तो जोड़ों में लचीलापन और ताकत बनी रहती है। कभी-कभार उंगलियां चटकाने से वात दोष बिगड़ता नहीं है, खासकर तब जब शरीर स्वस्थ हो। लेकिन अगर वात पहले से असंतुलित है, यानी व्यक्ति को जोड़ों में दर्द, सूजन या अकड़न की समस्या रहती है, तो उंगलियां चटकाना परेशानी बढ़ा सकता है।

यह भी पढ़ें- डिजिटल इंडिया में सरकार की नई पहल: पेंशनरों के लिए 'संपन्न' पोर्टल डिजीलॉकर से जुड़ा

हर व्यक्ति का शरीर एक जैसा नहीं होता। जो लोग पूरी तरह स्वस्थ हैं, जिनकी हड्डियां मजबूत हैं और जिनके जोड़ों में किसी तरह का दर्द नहीं है, उनके लिए उंगलियां चटकाना आमतौर पर नुकसानदायक नहीं माना जाता। लेकिन जिन लोगों को पहले से गठिया, आर्थराइटिस, हाई यूरिक एसिड, सूजन या हड्डियों की कमजोरी की शिकायत है, उनके लिए उंगलियां चटकाने से जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

कुछ लोग उंगलियां चटकाने को तनाव से राहत का तरीका भी मानते हैं। जब व्यक्ति घबराया हुआ या बेचैन होता है, तो अनजाने में यह आदत बन जाती है। विज्ञान मानता है कि इससे दिमाग को थोड़ी देर के लिए आराम महसूस हो सकता है, लेकिन यह कोई इलाज नहीं है। अगर तनाव बार-बार उंगलियां चटकाने की वजह बन रहा है, तो ध्यान, गहरी सांस और योग जैसे उपायों को अपनाना चाहिए।

न्यू इंडिया अब्रॉड की अन्य खबरों को पढ़ने के लिए क्लिक करें।

Comments

Related