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रिश्तों से आगे, पहचान की तलाश: भारतीय अमेरिकी युवाओं में ‘रूट्स 2.0’ ट्रैवल ट्रेंड

यह ट्रेंड भारतीय पर्यटन बोर्ड और स्थानीय व्यवसायों के लिए भी एक संकेत है कि भारतीय अमेरिकी समुदाय एकसमान नहीं है।

 प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर / Unsplash

कई दशकों तक युवा भारतीय-अमेरिकियों की भारत यात्रा एक तयशुदा और अक्सर थकाने वाले पैटर्न पर चलती रही- तीन हफ्तों में लगातार शादियां, जेट-लैग में मंदिर दर्शन और दूर-दराज के रिश्तेदारों के लिए अमेरिकी चॉकलेट से भरे सूटकेस। लेकिन 2026 की शुरुआत के साथ भारतीय-अमेरिकी समुदाय में एक नया संकल्प उभर रहा है। इसे “Roots 2.0” यात्रा कहा जा रहा है, जिसके तहत Gen Z और मिलेनियल भारतीय-अमेरिकी अब पारंपरिक “सिर्फ रिश्तेदारों से मिलने” वाली यात्राओं को छोड़कर क्यूरेटेड ‘डिस्कवरी टूर’ को प्राथमिकता दे रहे हैं।

इन यात्राओं का फोकस भारत के तेजी से बढ़ते टेक इकोसिस्टम, स्टार्टअप हब्स और सस्टेनेबल ईको-रिट्रीट्स पर है। यह बदलाव भारत को पारिवारिक मजबूरी के तहत देखने के बजाय एक आधुनिक और नवाचार-प्रधान देश के रूप में समझने की सोच को दर्शाता है।

यह भी पढ़ें- भारतीय अमेरिकियों के खिलाफ नस्लवाद बढ़ा, सोशल मीडिया से सियासत तक फैलता विरोध

यादों से नेटवर्किंग की ओर
लॉस एंजेलिस के 30 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर सिकंदर एस. कहते हैं, “मेरे माता-पिता के लिए भारत यादों की जगह था, लेकिन मेरे लिए यह सीखने और कुछ बनाने की जगह है।” सिकंदर ने इस बार नई दिल्ली में पारिवारिक कार्यक्रम छोड़कर बेंगलुरु और हैदराबाद में टी-हब और उभरते AI स्टार्टअप्स के कैंपस का दौरा किया। वे कहते हैं, “मैं भारत के संघर्षों और अतीत की कहानियां सुनकर बड़ा हुआ, लेकिन मैं उस भारत को देखना चाहता था जो आज दुनिया का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है। हाइटेक सिटी के टेक पार्क्स में सिलिकॉन वैली जैसी ऊर्जा महसूस होती है। यह अनुभव रिश्तेदारों के ड्रॉइंग रूम में बैठने से बिल्कुल अलग है।”

 

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