प्रतीकात्मक तस्वीर / Unsplash
जैसे ही साल 2026 की शुरुआत हुई है, “बिग फैट इंडियन वेडिंग” की पारंपरिक परिभाषा बदलती नजर आ रही है। अब चर्चा इस बात की नहीं रह गई कि दुल्हन का लहंगा कितना महंगा है, बल्कि यह सवाल अहम हो गया है कि उसकी कार्बन फुटप्रिंट कितनी है। न्यूयॉर्क और सैन फ्रांसिस्को जैसे बड़े शहरों में रहने वाली भारतीय-अमेरिकी दुल्हनों के बीच अब एक नई सोच उभर रही है, जिसे “सस्टेनेबल शादी” कहा जा रहा है।
अब तक दशकों से यह सामाजिक दबाव रहा है कि शादी या किसी बड़े समारोह में कपड़े दोहराए नहीं जाते। नतीजा यह होता था कि भारी, हाथ से कढ़े हुए परिधान महज छह घंटे पहने जाते और फिर अगले 30 सालों के लिए वैक्यूम सील बैग में बंद कर दिए जाते। लेकिन अब पर्यावरण के प्रति जागरूक नई पीढ़ी की दुल्हनें इस चलन को चुनौती दे रही हैं और एक बार पहनने वाली शानो-शौकत की जगह पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दे रही हैं।
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सिंगल-वियर कल्चर से बाहर निकलने की पहल: साड़ी स्वैप का बढ़ता चलन
इस बदलाव की अगुवाई कम्युनिटी आधारित पहलों द्वारा की जा रही है, जिनमें साड़ी स्वैप कलेक्टिव्स प्रमुख हैं। सैन फ्रांसिस्को में एक साड़ी स्वैप का आयोजन कर रहीं टेक प्रोफेशनल नेहा एस. कहती हैं कि यह बदलाव सिर्फ पर्यावरण के लिए नहीं, बल्कि सामुदायिक भावना के लिए भी है।
नेहा बताती हैं, “भारतीय-अमेरिकी समुदाय में लंबे समय तक यह एक अनकही सोच रही कि शादी में प्री-लव्ड या किराए के कपड़े पहनना स्टेटस के खिलाफ है। लेकिन 2026 में स्टेटस सिंबल किसी डिजाइनर टैग का नाम नहीं, बल्कि यह है कि आपने एक भारी सिल्क आउटफिट बनाने में लगने वाले करीब 15 किलो कार्बन उत्सर्जन से बचाव किया।”
विरासत से हाई फैशन तक: अपसाइक्लिंग की क्रांति
न्यूयॉर्क सिटी में यह ट्रेंड ‘हेरिटेज अपसाइक्लिंग’ के रूप में उभर रहा है। इसमें दुल्हनें अपनी मां या दादी की शादी की साड़ियों और सिल्क को आधुनिक डिजाइन में ढाल रही हैं।
नई 5,000 डॉलर की ड्रेस खरीदने की बजाय, कई महिलाएं 40 साल पुरानी कांजीवरम साड़ियों को स्पेशल टेलर्स के पास ले जाकर ब्लेज़र, सिगरेट पैंट्स या मॉडर्न केप्स में बदलवा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की अपसाइक्लिंग से एक शादी के वार्डरोब में लगने वाले पानी की खपत में 80 फीसदी तक की कमी आ सकती है, क्योंकि इसमें नई सिल्क उत्पादन और केमिकल डाइंग की जरूरत नहीं पड़ती।
न्यूयॉर्क की कंसल्टेंट दिव्या एम., जो नियमित रूप से साड़ी स्वैप इवेंट्स में जाती हैं, कहती हैं, “मैंने एक विंटेज बनारसी साड़ी को देखा, जो तीन अलग-अलग राज्यों में तीन शादियों में पहनी गई थी और आखिरकार एक कॉलेज छात्रा के पास पहुंची, जो इसे अपने ग्रेजुएशन के लिए पहनना चाहती थी। ऐसा लगता है जैसे हम अपनी संस्कृति की सामूहिक भावना को फिर से जीवित कर रहे हैं और उस फिजूलखर्ची से बाहर निकल रहे हैं, जिसे आधुनिक इंडस्ट्री ने हम पर थोप दिया था।”
marriage / Unsplashस्टेटस की नई परिभाषा: प्रवासी भारतीयों की बदलती सोच
देसी वार्डरोब का डी-कार्बनाइजेशन अब ग्लोबल भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लिए एक बड़ा सांस्कृतिक मोड़ बन चुका है। किराए, स्वैप और अपसाइक्लिंग को अपनाकर प्रवासी भारतीय यह साबित कर रहे हैं कि परंपरा का मतलब अपव्यय नहीं होता।
साउदर्न कैलिफोर्निया की फिल्म प्रोड्यूसर काजरी ए., जो इस साल अपनी शादी की योजना बना रही हैं, कहती हैं, “मेरी मां ने मंडप में जो परिधान पहना था, उसे तोड़कर उसमें नई जान डालना एक बेहद भावनात्मक अनुभव है। मैं उसकी गोल्ड ज़री बॉर्डर को रखकर एक हल्का मॉडर्न कॉर्सेट और ऑर्गेंजा स्कर्ट बनवा रही हूं। मुझे लगता है कि उन धागों में अपने पूर्वजों से जुड़ाव ज्यादा महसूस होगा, बजाय किसी मास-प्रोड्यूस्ड डिजाइनर ड्रेस के।”
सस्टेनेबल शादी: 2026 की सबसे स्टाइलिश पसंद
कुल मिलाकर, “बिग फैट इंडियन वेडिंग” का दिखावा अब पर्यावरणीय जिम्मेदारी और रचनात्मक संसाधनशीलता में बदल रहा है। 2026 के वेडिंग सीजन में सस्टेनेबल शादी खुद को सबसे स्टाइलिश विकल्प के रूप में स्थापित कर रही है।
यह ट्रेंड बताता है कि 2026 की ब्राइडल ट्रॉसो में सबसे कीमती चीज सिर्फ रेशम या गहने नहीं, बल्कि एक सर्कुलर इकोनॉमी के प्रति प्रतिबद्धता है, जो कारीगरों और धरती दोनों का सम्मान करती है। दक्षिण एशियाई विरासत के रंग अब हरियाली की कीमत पर नहीं, बल्कि उसके साथ मिलकर चमकेंगे।
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