याकी मंकी / wikipedia
भारतीय सिनेमा में पिछले कुछ समय में ऐसी कई फिल्में आई हैं, जिन्होंने दर्शकों को मजबूत संदेश देने का काम किया है। अब अभिनेता और निर्देशक अंशुमन झा की फिल्म 'लकड़बग्घा 2: द मंकी बिजनेस' को कान्स के 'मार्चे डू फिल्म' में एक्सक्लूसिव मार्केट स्क्रीनिंग के लिए चुना गया है। फिल्म इस साल अपने आधिकारिक वर्ल्ड प्रीमियर से पहले इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन की तैयारी कर रही है।
यह फिल्म जानवरों की घटती संख्या और पर्यावरण को हो रहे नुकसान जैसे गंभीर मुद्दों पर आधारित है। फिल्म को लेकर अंशुमन झा ने कहा कि 'लकड़बग्घा' का पहला पार्ट कुत्तों के प्रति प्यार से जुड़ा हुआ था, लेकिन इस बार हमने अपनी सोच को और बड़ा किया है।
'लकड़बग्घा 2: द मंकी बिजनेस' सिर्फ किसी एक जानवर की कहानी नहीं है, बल्कि यह सभी जानवरों की आवाज है। आज जानवर इसलिए खत्म हो रहे हैं, क्योंकि इंसानियत धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है।'
उन्होंने कहा कि 'इस बार फिल्म में हर लड़ाई के पीछे एक भावना रखी गई है। यह फिल्म दर्शकों से सवाल पूछती है कि आखिर इंसान किस बात के लिए खड़ा है और क्या वह सही चीजों की रक्षा करने के लिए तैयार है।'
उन्होंने कहा कि कान्स का यह मंच इस फिल्म को दुनियाभर के उन दर्शकों तक पहुंचाने में मदद करेगा, जो सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि दिल और दिमाग को छू लेने वाला सिनेमा पसंद करते हैं।
फिल्म की कहानी इंडोनेशिया की पृष्ठभूमि पर आधारित है। फिल्म में लड़ाई के सीन इस अंदाज में फिल्माए गए हैं, जिससे दर्शकों को वास्तविक अनुभव महसूस हो। फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका पर्यावरण से जुड़ा संदेश है।
फिल्म में 'याकी मंकी' नाम के बेहद दुर्लभ बंदर की घटती संख्या को दिखाया गया है। जानकारी के मुताबिक, साल 1990 में इन बंदरों की संख्या करीब 50 हजार थी, लेकिन जंगलों की कटाई और अवैध जानवरों के व्यापार की वजह से अब इनकी संख्या घटकर 5 हजार से भी कम रह गई है।
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