सांकेतिक छवि... / AI Generated
आज के वैश्विक परिदृश्य को देखते-विचार करते हुए महर्षि वेदव्यास की महान रचना महाभारत के कई दृश्य हजारों वर्षों बाद फिर से आकार लेते दिखते हैं। एक वह दृश्य भी आंखों में तैरने लगता है जहां महाराज धृतराष्ट्र की सभा में युद्ध की आहट के बीच शांति प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है। कृष्ण कहते हैं- शांति कोई प्रस्ताव नहीं, यह अनिवार्यता है। विडंबना देखिए, आज भी दुनिया महाभारत का एक वैसा ही मंच दिखाई दे रही है। विश्व के कई हिस्सों में जंग की पृष्ठभूमि में बड़े-बड़े महारथी शांति की तलाश कर रहे हैं। एक देश से दूसरे देश की यात्रा कर रहे हैं। सब शांति की बात कर रहे हैं लेकिन एक नया युद्ध शुरू हो रहा है। कितनी अजीब बात है कि एक युद्ध समाप्त नहीं होता... टकराव का दूसरा मोर्चा खड़ा हो जाता है। महाभारत में भी दोनों पक्षों (कौरव-पांडव) में कई लोग ऐसे थे जो युद्ध नहीं चाहते थे। लेकिन दोनों ही पक्षों में ऐसे लोगों की भी कमी न थी जो युद्ध चाहते थे। सबके अपने-अपने विश्वास और आशंकाएं थीं। और सच कहें तो आशंकाएं कम थीं विश्वास या अंधविश्वास अधिक थे। अपनी-अपनी विजय के। अंतत: युद्ध हुआ। कौन जीता यह तो सब जानते हैं लेकिन दोनों पक्षों ने अपना बहुत कुछ खो दिया।
हर युद्ध यही संदेश देता है कि उससे हासिल कम होता है हानि अधिक। लेकिन फिर भी... आज भी देखिए कि शांति की बातें तो हो रही हैं लेकिन धमकियों के साथ। शांति के प्रस्ताव धमकी की तश्तरी में रखकर भेजे जा रहे हैं। लेकिन क्या इससे शांति हासिल हो पा रही है। नहीं। हालात जटिल ही हो रहे हैं। शांति की एक युक्ति शक्ति भी है। लेकिन तब जब शक्ति संतुलित, विवेकशील और धैर्य धरने वाली हो। रूस और यूक्रेन के टकराव को बरसों हो गए हैं। कई दिखने वाली कोशिशों के बावजूद वहां शांति नहीं। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच महाबली अमेरिका में ट्रंप की दूसरी पारी शूरू हुई और फिर कई जगहों पर जंग का सिलसिला शुरू हो गया। युद्ध और युद्धविरामों के बीच फिलहाल पश्चिम एशिया संकट ने दुनिया के तमाम देशों की अर्थव्यवस्थाओं को हिलाकर रख दिया है। इसी बीच दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी यानी भारत और पाकिस्तान के बीच भी आतंकवाद के प्रतिउत्तर में कुछ दिन जंग जैसे हालात रहे। कुछ दिन चली भिड़ंत में दोनों ओर से कई लोग मारे गए। पूरब से पश्चिम तक सब हिल चुका है। दुनिया में हर तरफ खटास है, खलिश है, हालात काबू करने के चर्चे हैं लेकिन स्थितियां नियंत्रण में या शांत होती दिख नहीं रहीं। जंग की आंच धीरे-धीरे छोटे-बड़े देशों को प्रभावित कर रही है। उनको भी जो जंग पर आमादा हैं। अब ऐसे में शांति की स्थापना कैसे होगी यह तो समय ही बताएगा लेकिन यह तय है कि पूरी दुनिया को युद्ध में जलने से बचाने के लिए अभूतपूर्व सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
अन्य खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें न्यू इंडिया अब्रॉड
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login