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लेखिका इंदु विश्वनाथन का तर्क है कि हिंदू विद्वानों को तब आसानी से स्वीकार किया जाता है जब उनके विचार प्रचलित अकादमिक विमर्श के अनुरूप होते हैं।

इंदु विश्वनाथन ने हिंदू धर्म के अकादमिक अध्ययन में हिंदुओं के प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता जाहिर की।
Credit: Indu Viswanathan Website