ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

अध्ययन: अकादमिक हलकों में कथित हिंदू-विरोधी पूर्वाग्रह की पड़ताल

लेखिका इंदु विश्वनाथन का तर्क है कि हिंदू विद्वानों को तब आसानी से स्वीकार किया जाता है जब उनके विचार प्रचलित अकादमिक विमर्श के अनुरूप होते हैं।

 इंदु विश्वनाथन ने हिंदू धर्म के अकादमिक अध्ययन में हिंदुओं के प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता जाहिर की।  इंदु विश्वनाथन ने हिंदू धर्म के अकादमिक अध्ययन में हिंदुओं के प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता जाहिर की। / Indu Viswanathan Website

हिंदू-अमेरिकी स्कॉलर इंदु विश्वनाथन के हालिया अकादमिक अध्ययन ने हिंदू अध्ययन के क्षेत्र में हिंदू आवाजों के प्रतिनिधित्व को लेकर चिंता जताई है। अध्ययन का तर्क है कि जो हिंदू स्कॉलर अकादमिक जगत में हावी नैरेटिव को चुनौती देते हैं, उन्हें अक्सर पहचान और भागीदारी में रुकावटों का सामना करना पड़ता है।

यह स्टडी 'जर्नल ऑफ द काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन रिलीजन' में प्रकाशित हुई थी। इस पेपर का शीर्षक है, 'अमेरिकी पब्लिक एजुकेशन में हिंदू-विरोधी पूर्वाग्रह की जांच: हिंदूफोबिया का एंडोजेनस चक्र।'

स्टडी उस चीज की जांच करती है जिसे विश्वनाथन "हिंदूफोबिया का एंडोजेनस चक्र" कहती हैं - एक ऐसा फ्रेरेमवर्क जिसके जरिए स्टीरियोटाइप, जरूरी बातों को नजरअंदाज करने और एकेडमिक व सार्वजनिक चर्चाओं में हिंदू आवाजों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाकर हिंदू धर्म और हिंदुओं के बारे में नकारात्मक धारणाओं को बढ़ावा दिया जाता है।
 

This post is for paying subscribers only

SUBSCRIBE NOW

Comments

Related