समुदाय की चिंताएं साझा। / X/@CoHNAOfficial
अमेरिका में भारतीय मूल के हिंदू समुदाय ने अपनी आवाज को मजबूत करते हुए अमेरिकी लॉमेकर्स के सामने हिंदू विरोधी नफरत, सामाजिक भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे अहम मुद्दे उठाए। यह पहल कोएलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका (सीओएचएनए) की ओर से आयोजित पांचवें वार्षिक 'हिंदू डे ऑफ एडवोकेसी' कार्यक्रम के दौरान की गई।
अमेरिकी संसद परिसर (यूएस कैपिटल) में आयोजित इस पूरे दिन के कार्यक्रम में 14 राज्यों से करीब 160 लोगों ने हिस्सा लिया। आयोजकों के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने सीनेटरों और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) के सदस्यों के साथ 50 से अधिक बैठकें कीं। इसके अलावा उन्होंने करीब 170 कांग्रेस कार्यालयों का दौरा कर हिंदू अमेरिकी समुदाय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में अधिक भागीदारी की अपील की।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित स्वागत समारोह में अमेरिका में भारत की उप मिशन प्रमुख नामग्या सी. खंपा ने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत और भविष्य की ओर बढ़ने वाला बताया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका की साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है और दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने इसके लिए बड़े लक्ष्य तय किए हैं।
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हाल ही में फ्रांस में मुलाकात हुई थी। दोनों देशों को मिलकर अभी बहुत कुछ हासिल करना है और इस दिशा में भारतीय मूल का समुदाय एक महत्वपूर्ण साझेदार है।"
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सीओएचएनए के अध्यक्ष निकुंज त्रिवेदी ने बताया कि इस कार्यक्रम में डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए और उन्होंने हिंदू समुदाय के साथ एकजुटता जताई।
उन्होंने कहा, "कई विशेषज्ञ और दोनों दलों के सांसद हमारे साथ जुड़े। उन्होंने हमारे समुदाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए कैपिटल हिल आने पर हमारा धन्यवाद किया। अक्सर हमारा समुदाय अपनी बात खुलकर नहीं रखता, लेकिन अब यह बदल रहा है।"
निकुंज त्रिवेदी के अनुसार लॉमेकर्स के साथ हुई चर्चाओं में बढ़ती हिंदू विरोधी बयानबाजी, हिंदू मंदिरों पर हमले, सोशल मीडिया पर भारतीय प्रवासियों के खिलाफ नफरत और हिंदुओं को गलत तरीके से विदेशी सरकारों का एजेंट बताने जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
उन्होंने कहा, "जब हम अपने अधिकारों, हिंदू मंदिरों पर हमलों या अपनी धार्मिक पहचान की बात करते हैं, तब हमें भारत सरकार का एजेंट बताया जाता है। हमने सीनेटरों को समझाया कि इसी तरह हमारे समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।"
इस कार्यक्रम में करीब 40 युवा हिंदू-अमेरिकियों ने यूथ समिट में हिस्सा लिया। साथ ही सीओएचएनए ने एक लीडरशिप इनक्यूबेटर भी शुरू किया, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी के हिंदू सामुदायिक नेताओं को तैयार करना है।
आयोजकों ने बताया कि विभिन्न धर्मों के नेताओं ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया और हिंदू मंदिरों पर होने वाले हमलों की निंदा करते हुए समुदाय के प्रति अपना समर्थन जताया।
इस दौरान रटगर्स यूनिवर्सिटी के छात्रों के एक पैनल ने बताया कि वे कैंपस में कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं, विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ संवाद बढ़ा रहे हैं और हिंदू छात्रों को सामाजिक व लोकतांत्रिक गतिविधियों में अधिक सक्रिय होने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका कहना था कि वे चाहते हैं कि युवा हिंदू-अमेरिकी सार्वजनिक जीवन में आगे आएं और उनकी धार्मिक पहचान को शैक्षणिक एवं सार्वजनिक मंचों पर सही तरीके से प्रस्तुत किया जाए।
यह आयोजन हिंदू अमेरिकी संगठनों के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद बनाए रखना और अमेरिकी लोकतंत्र में हिंदू समुदाय की भागीदारी को बढ़ाना है। पिछले एक दशक में भारतीय-अमेरिकी समुदाय अमेरिका के सबसे तेजी से बढ़ते और राजनीतिक रूप से सक्रिय प्रवासी समुदायों में शामिल हुआ है। व्यापार, शिक्षा, सार्वजनिक जीवन और सामाजिक संगठनों में भी उनकी मौजूदगी लगातार मजबूत हुई है।
यह कार्यक्रम ऐसे समय आयोजित हुआ, जब अमेरिका अपनी 250वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा है। इस अवसर पर आयोजकों ने इस बात का ज्यादा जिक्र किया कि हिंदू-अमेरिकी समुदाय अमेरिका के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है और भारत-अमेरिका के रणनीतिक, आर्थिक, तथा लोगों के बीच मजबूत होते रिश्तों के साथ उसकी भूमिका भी लगातार बढ़ रही है।
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