विवादित पोस्टर / Harvard University
उत्तरी अमेरिका के हिंदुओं के गठबंधन (सीओएचएनए) ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के दक्षिण एशियाई अध्ययन विभाग पर संस्कृत भाषा और हिंदू धर्म को गलत तरीके से पेश करने और उसे 'राक्षसी' बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। विवाद की वजह विभाग द्वारा अपनी वेबसाइट पर संस्कृत कोर्स के प्रचार के लिए इस्तेमाल की गई एक कलाकृति है, जिसे हिंदू संगठन ने 'घोर हिंदूफोबिया और सांप्रदायिकता' करार दिया है।
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दरअसल, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के दक्षिण एशियाई अध्ययन विभाग ने अपनी वेबसाइट पर संस्कृत भाषा के एक कोर्स की जानकारी साझा की है। जहां एक तरफ लेखन में संस्कृत के महत्व और उसकी साहित्यिक उपलब्धियों का बखान किया गया है, वहीं कोर्स के साथ लगाई गई तस्वीर ने हिंदू समुदाय में आक्रोश फैला दिया है।
क्या है विवादित तस्वीर?
विभाग द्वारा इस्तेमाल की गई तस्वीर में एक काले रंग की पृष्ठभूमि में एक पुरुष आकृति है, जिसके माथे पर 'ऊर्ध्व पुंड्रा तिलक' (वैष्णव समुदाय द्वारा लगाया जाने वाला पवित्र चिह्न) साफ देखा जा सकता है। इस आकृति के सिर पर मोर पंख भी है, जो सीधे तौर पर भगवान कृष्ण से जुड़ाव दर्शाता है। सबसे अधिक आपत्तिजनक पहलू यह है कि इस आकृति को एक 'कठपुतली मास्टर' की तरह दिखाया गया है, जो डोरी से कई पुतलियों (फिगरिन) को नचा रहा है।
Blatant Hinduphobia and bigotry on display at @Harvard’s South Asian studies department.
— CoHNA (Coalition of Hindus of North America) (@CoHNAOfficial) February 27, 2026
A scene that feels straight out of a horror movie, starring a dark Hindu figure (notice the Tilak on his forehead) dangling some sort of ghostly figurines in his hands.
This is how… pic.twitter.com/UYzt3dQLMp
जांच से पता चला है कि यह छवि 'अनिरुद्ध' नामक कलाकार की है, जो 'मोली' उपनाम से कला वेबसाइट 'डेवियंट आर्ट' पर अपनी रचनाएं पोस्ट करते हैं। इस कलाकार की अधिकांश कलाकृतियां हिंदू देवी-देवताओं के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं।
हिंदू संगठन का आरोप: 'हॉरर फिल्म जैसा दृश्य'
सीओएचएनए ने इस तस्वीर की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह "सीधे किसी हॉरर फिल्म से निकला हुआ दृश्य" लगता है। संगठन के अनुसार, "एक अंधेरे हिंदू आकृति (जिसके माथे पर तिलक है) को अपने हाथों में भूतिया पुतलियां लटकाते हुए दिखाना, हिंदू आस्था और संस्कृति का अपमान है।"
संगठन ने आरोप लगाया कि यह महज संस्कृत भाषा का गलत प्रतिनिधित्व नहीं है, बल्कि हिंदू धर्म की भावनाओं से खिलवाड़ है। उन्होंने कहा, "संस्कृत दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है, जिसने शास्त्रीय साहित्य, कला, संगीत और दुनिया की कई भाषाओं को जन्म दिया है। एक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में छात्रों को इस भाषा से परिचित कराने का यह तरीका बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।"
हिंदू संगठन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी प्रशासन से मांग की है कि वह इस आपत्तिजनक तस्वीर को तुरंत हटाए और भविष्य में संवेदनशीलता बरतने का आश्वासन दे। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर हार्वर्ड विश्वविद्यालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
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