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अमेरिका की दवा बनाने वाली बड़ी कंपनियां अब अपना काम करने का तरीका बदल रही हैं। तेजी से बदलती तकनीक, दुनिया भर की राजनीतिक अनिश्चितता और मजबूत सप्लाई चेन की जरूरत के कारण दवा उद्योग नए रास्ते अपना रहा है। दवा कंपनियों के बड़े अधिकारियों ने कहा कि पहले कंपनियां बड़े और एक जगह से चलने वाले उत्पादन सिस्टम पर निर्भर थीं लेकिन अब वे ज्यादा लचीले, तेज और अलग-अलग जगहों पर फैले सिस्टम बना रही हैं।
ये नए सिस्टम उन्नत इलाज, तेज काम और दुनिया भर की साझेदारी पर आधारित हैं। मर्क मैन्युफैक्चरिंग डिवीजन के अध्यक्ष सनत चट्टोपाध्याय ने कहा कि यह उद्योग अब एक बड़े बदलाव के दौर में है। भविष्य का सिस्टम पहले जैसा नहीं होगा। अब एंटीबॉडी-ड्रग इलाज, सेल थेरेपी और जीन थेरेपी जैसे नए और मुश्किल इलाज तेजी से बढ़ रहे हैं। इन इलाजों में बहुत ज्यादा सावधानी और तेज़ी की जरूरत होती है।
उन्होंने कहा कि हर मरीज के लिए हर बार सौ प्रतिशत सही होना जरूरी है। कंपनियों को नया इलाज बाजार में लाने के लिए 12 से 16 महीनों के भीतर पूरी तैयारी करनी पड़ती है।
मर्क एंड कंपनी में ह्यूमन हेल्थ मैन्युफैक्चरिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डेव माराल्डो ने कहा कि इलाज जितने जटिल हो रहे हैं, कंपनियों को उतनी ही ज्यादा साझेदारी करनी पड़ रही है।अब ज्यादा से ज्यादा साझेदारों से जुड़ना बहुत जरूरी हो गया है।
उन्होंने बताया कि साझेदारी के दो हिस्से होते हैं। पहला होता है साथ काम करने से पहले समझना और दूसरा साथ काम करते समय प्रदर्शन देखना होता है। इस दौरान कंपनियां यह देखती हैं कि सामने वाली कंपनी नियमों का पालन करती है या नहीं, उसकी डिजिटल क्षमता कैसी है और उसकी काम करने की संस्कृति कैसी है।
माराल्डो ने कहा कि सही सोच और काम करने का तरीका बहुत जरूरी है। अगर गुणवत्ता की बात सिर्फ गुणवत्ता विभाग के लोग ही कर रहे हों, तो यह खतरे का संकेत है। अधिकारियों ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों की बढ़ती भूमिका से भी यह बदलाव तेज हो रहा है।
एस्टेलस के मुख्य विनिर्माण अधिकारी राव मंत्री ने कहा कि अब दवा बनाना सिर्फ आखिरी काम नहीं रह गया है, बल्कि शुरुआत से ही इसका ध्यान रखना पड़ता है। दवा बनाना अब बाद में सोचने वाली चीज नहीं बल्कि बहुत जरूरी रणनीति है। नए इलाजों के कारण पूरा काम जल्दी करना पड़ता है। अब पूरा समय कम हो गया है और लॉन्च के बाद सुधार का मौका भी कम मिलता है। इसलिए शुरुआत से ही सही योजना बनानी पड़ती है।
फाइजर के मुख्य वैश्विक सप्लाई और गुणवत्ता अधिकारी माइक मैकडरमॉट ने कहा कि अब सप्लाई सिस्टम कंपनी की सबसे जरूरी रणनीति बन गया है। हमें सिर्फ गोदाम भरने वाले लोग नहीं बनना है, हमें फैसलों का नेतृत्व करना है। इस क्षेत्र में नेतृत्व का तरीका भी तेजी से बदल रहा है। आपको बदलाव लाने वाला नेता बनना होगा और एआई जैसी नई तकनीक अपनानी होगी।
उन्होंने कहा कि बदलाव की रफ्तार बहुत तेज है और इसे टाला नहीं जा सकता। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई अब बहुत महत्वपूर्ण बन रही है। हालांकि हर जगह इसका इस्तेमाल अभी बराबर नहीं है।
मैकडरमॉट ने कहा कि एआई की मदद से पुराना डेटा जल्दी मिल सकता है और फैसले तेजी से लिए जा सकते हैं। अगर हर पुरानी जांच रिपोर्ट एक सेकंड में आपके सामने आ जाए, तो सोचिए कितना समय बचेगा।
माराल्डो ने कहा कि एआई अब फैक्टरी के अंदर भी काम कर रही है। यह काम करने वाले व्यक्ति को बताती है कि अगला सबसे सही कदम क्या होना चाहिए। उन्होंने मशीन खराब होने से पहले पता लगाना और काम को बेहतर बनाना जैसे उदाहरण दिए। हालांकि अधिकारियों ने कहा कि सरकारी नियमों की धीमी प्रक्रिया इसकी रफ्तार कम कर सकती है।
मैकडरमॉट ने कहा कि नियम बनाने वाले उतनी तेजी से नहीं चल रहे जितनी हमें जरूरत है। उद्योग के नेताओं ने कहा कि दुनिया की राजनीति और नीतियों में बदलाव भी दवा बनाने की योजना को प्रभावित कर रहे हैं।
एली लिली में विनिर्माण संचालन के अध्यक्ष एडगार्डो हर्नांडेज ने कहा कि सप्लाई सिस्टम को छोटी राजनीति नहीं, बल्कि लंबे समय की मजबूती के हिसाब से बनाना चाहिए। रणनीति का आधार मजबूती होना चाहिए, सिर्फ राजनीति नहीं।
उन्होंने बताया कि दवा सप्लाई सिस्टम जल्दी नहीं बदलता और इसमें बदलाव करने में कई साल लग जाते हैं। कंपनियां अब अलग-अलग जगहों पर काम फैलाने पर ध्यान दे रही हैं। हम अलग-अलग देशों और अंदर-बाहर दोनों तरह की साझेदारी पर काम कर रहे हैं।
माराल्डो ने कहा कि कंपनियां ऐसा सिस्टम बनाना चाहती हैं जो सरकार की बदलती नीतियों से ज्यादा प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि अगर हम सिर्फ नीति बदलने पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, तो हम पहले ही पीछे रह गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि दुनिया भर में साझेदारी बढ़ने के साथ बौद्धिक संपत्ति यानी नई तकनीक और जानकारी की सुरक्षा भी बहुत जरूरी हो गई है।
हर्नांडेज ने कहा कि दवा बनाने की प्रक्रिया में बहुत महत्वपूर्ण जानकारी छिपी होती है, खासकर जटिल जैविक दवाओं में। इसलिए बाहर की कंपनियों के साथ काम करते समय सुरक्षा बहुत जरूरी है।
राव मंत्री ने कहा कि नए इलाजों में यह खतरा और भी ज्यादा होता है। उन्होंने कहा कि यह जोखिम छोटी दवाओं की तुलना में बहुत ज्यादा है। इन सब चुनौतियों के बावजूद अधिकारियों ने कहा कि दुनिया भर की साझेदारी आगे भी जरूरी रहेगी। नई दवाओं के लिए खास तकनीक और विशेषज्ञता चाहिए, इसलिए कंपनियां अब अपने कारखानों के साथ-साथ बाहर की कंपनियों पर भी निर्भर हो रही हैं।
साथ ही नेताओं ने कहा कि सही डेटा और साफ जानकारी बहुत जरूरी है। माराल्डो ने कहा कि 80 प्रतिशत इंजीनियर अपना समय सिर्फ डेटा संभालने में लगा देते हैं। उन्होंने बताया कि इतनी बड़ी मात्रा में जानकारी को सही तरीके से संभालना एक बड़ी चुनौती है।
अधिकारियों ने कहा कि एआई, डिजिटल सिस्टम और ऑटोमेशन आने वाले समय में काम को और आसान और तेज बनाएंगे लेकिन यह अच्छे डेटा और सही नियमों पर निर्भर करेगा। इस पूरी चर्चा से साफ हुआ कि दवा बनाने का क्षेत्र तेजी से बदल रहा है। यह बदलाव नई तकनीक, दुनिया भर के जुड़ाव और मरीजों की बढ़ती उम्मीदों के कारण हो रहा है।
कोविड-19 महामारी ने दुनिया को दिखाया कि सप्लाई सिस्टम कितना कमजोर हो सकता है। इसके बाद कंपनियों और सरकारों ने मजबूत सिस्टम और अपने देश में उत्पादन बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। साथ ही नई जैविक दवाओं, जीन थेरेपी और व्यक्तिगत इलाज के बढ़ने से दवा बनाने का तरीका पूरी तरह बदल रहा है।
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