भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से उद्योग जगत उत्साहित / IANS
भारत-अमेरिका के बीच हुए टैरिफ समझौते का देश के रत्न और आभूषण उद्योग ने स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक करार दिया है। उद्योग जगत के प्रमुख नेताओं का कहना है कि इस समझौते से भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिका का बड़ा और उच्च-मूल्य वाला बाजार खुलेगा और द्विपक्षीय व्यापार को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा।
किरण जेम्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दिनेश लखानी ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए फायदेमंद साबित होगा। उन्होंने बताया कि पहले ऊंचे टैरिफ के कारण भारत से अमेरिका जाने वाले रत्न-आभूषण निर्यात का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा एक साल से अधिक समय तक रुका हुआ था। अब इस सेक्टर में टैरिफ शून्य होने से भारतीय उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार पूरी तरह खुल गया है।
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लखानी के अनुसार, इस फैसले से अमेरिका की चेन स्टोर्स और स्वतंत्र ज्वैलर्स अब भारत से अधिक मात्रा में सोर्सिंग कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल सेवा आधारित अर्थव्यवस्था नहीं रहा, बल्कि एक वैश्विक व्यापारिक ताकत बनकर उभरा है। यह समझौता ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस डील के तहत अमेरिका को होने वाला निर्यात पिछले डेढ़ साल की तुलना में लगभग दोगुना हो सकता है। उद्योग-से-उद्योग व्यापार में तेजी आएगी और वे बाजार भी खुलेंगे जो पहले भारतीय कंपनियों के लिए सीमित थे।
जयपुर से संबद्ध जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के पूर्व चेयरमैन और संभवन जेम्स लिमिटेड के चेयरमैन राजीव जैन ने भी इस फैसले को निर्यातकों के लिए बड़ी राहत बताया। उन्होंने कहा कि रत्नों पर टैरिफ शून्य कर दिया गया है, हालांकि आभूषणों पर अभी भी 24 प्रतिशत शुल्क लागू है।
राजीव जैन ने कहा कि अमेरिका भारत के रत्न-आभूषण निर्यात का सबसे बड़ा बाजार है और ऊंचे टैरिफ के कारण उद्योग को पहले भारी नुकसान झेलना पड़ा था। उन्होंने इस कदम के लिए सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया।
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