इंडियन ऑयल / Reuters
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और वैश्विक ट्रेडर विटोल के बीच समान हिस्सेदारी वाला तेल ट्रेडिंग जॉइंट वेंचर बनाने वाला सौदा अब टाल गया है। दो स्रोतों ने यह जानकारी दी।
सौदे में देरी का मुख्य कारण IOC और विटोल के बीच कुछ शर्तों पर मतभेद है। इसमें सबसे बड़ा विवाद यह है कि IOC की कच्चे तेल की कितनी खरीद JV के तहत आएगी, और साथ ही ट्रेडर के लिए निकास की शर्त (एग्जिट क्लॉज) कब लागू होगी इस पर दोनों पक्षों की राय अलग है।
IOC चाहता था कि यह सौदा India Energy Week में तय हो जाए। IOC का मकसद विटोल की विशेषज्ञता और वैश्विक नेटवर्क का फायदा उठाकर अंतरराष्ट्रीय तेल और ईंधन ट्रेडिंग में कदम बढ़ाना था।
स्रोतों के अनुसार, यह JV IOC की कुल आयात का केवल एक छोटा हिस्सा संभालेगा। विटोल चाहती है कि IOC के स्पॉट क्रूड आयात का 10% से 15% हिस्सा उसके पास हो। JV को सिंगापुर में स्थापित करने की योजना है और शुरू में यह 5–7 साल चलेगा। विटोल चाहती है कि निकासी की शर्त कम से कम 10 साल तक रहे।
वैश्विक स्तर पर ट्रेडर्स अब भारत की ओर ध्यान दे रहे हैं क्योंकि देश में ईंधन की मांग बढ़ रही है और रिफाइनिंग क्षमता बढ़ रही है। IOC और उसकी सहायक कंपनी चेन्नई पेट्रोलियम भारत की 5.2 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) रिफाइनिंग क्षमता का लगभग 31% नियंत्रित करती हैं।
इसके अलावा, भारत पेट्रोलियम कॉर्प (BPCL) भी फरवरी में सिंगापुर में ट्रेडिंग डेस्क खोलने की योजना बना रही है।
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