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बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हिंसा के खिलाफ US के 25 शहरों में रैलियां और प्रार्थना सभाएं

ये सभाएं सिटी हॉल, सिविक सेंटर और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित की गईं। इस दौरान प्रतिभागियों ने मौन रखकर श्रद्धांजलि दी, प्रार्थनाएं कीं और कमजोर धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की शांतिपूर्ण अपील की।

बांग्लादेश में हिंसा के खिलाफ अमेरिका भर में प्रदर्शन / Courtesy: Global Coalition for the Protection of Hindus in Bangladesh

बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ कथित हिंसा को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अमेरिका भर में हिंदू और अन्य अंतर-धार्मिक समुदाय संगठनों ने 25 अमेरिकी शहरों में रैलियों और प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया।

ये रैलियां एक गैर-दलीय और मानवीय जागरूकता पहल के तहत आयोजित की गईं, जिसका उद्देश्य समुदाय के सदस्यों, धर्मगुरुओं और जागरूक नागरिकों को एकजुट कर उन लोगों के प्रति एकजुटता दिखाना था, जिन्होंने धार्मिक पहचान के आधार पर कथित लक्षित हमलों में अपनी जान गंवाई है।

सार्वजनिक स्थलों पर शांतिपूर्ण आयोजन
ये सभाएं सिटी हॉल, सिविक सेंटर और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर आयोजित की गईं। इस दौरान प्रतिभागियों ने मौन रखकर श्रद्धांजलि दी, प्रार्थनाएं कीं और कमजोर धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की शांतिपूर्ण अपील की।

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इस पहल के प्रमुख समन्वयकों में से एक दाइपायन देब ने कहा, “ये रैलियां शांतिपूर्ण, गरिमापूर्ण और पूरी तरह मानवीय उद्देश्य से प्रेरित थीं।” उन्होंने आगे कहा,“कठिन परिस्थितियों के बावजूद लोग बड़ी संख्या में पहुंचे, क्योंकि हिंसा के सामने चुप रहना तटस्थता नहीं है। जागरूकता जवाबदेही की पहली सीढ़ी है और शांतिपूर्ण नागरिक भागीदारी नागरिक समाज के पास मौजूद सबसे मजबूत औजारों में से एक है।”

राजनीति नहीं, मानवीय गरिमा का सवाल
रैलियों के आयोजन से जुड़ीं सामुदायिक नेता दीप्ति महाजन ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए कहा, “यह राजनीति का नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा के लिए खड़े होने का मुद्दा है। जब निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जाता है, तो करुणा को डर और असुविधा से अधिक मुखर होना चाहिए।”

स्थानीय नेताओं की मौजूदगी
कई शहरों में स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों और सिविक नेताओं ने इन आयोजनों में भाग लिया या औपचारिक रूप से समर्थन व्यक्त किया। इसे शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति के महत्व और मानवाधिकार मुद्दों को उजागर करने में सामुदायिक प्रयासों की भूमिका की मान्यता के रूप में देखा गया।

प्रार्थना, स्मरण और प्रतीकात्मक कार रैलियां
इन आयोजनों में संक्षिप्त प्रार्थनाएं, पीड़ितों का स्मरण, अहिंसा और मानवीय गरिमा पर केंद्रित वक्तव्य, और कुछ स्थानों पर प्रतीकात्मक कार रैलियां भी शामिल रहीं। इस पहल में अहम भूमिका निभाने वाली सामुदायिक नेता गीता सिकंद ने कहा, “इन आयोजनों में समुदायों, धर्मों और क्षेत्रों के पार एकजुटता देखने को मिली—न्याय और मानवता के लिए एक साथ उठती शांतिपूर्ण आवाजें।”

बांग्लादेशी हिंदू अमेरिकियों की चिंता
एक अन्य प्रमुख समन्वयक ने बताया कि रैलियों में शामिल बांग्लादेशी हिंदू अमेरिकियों ने बांग्लादेश में जारी हिंसा के बीच हिंदुओं के अस्तित्व को लेकर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा, “चिंता की बात यह भी है कि बांग्लादेश सरकार की उदासीनता साफ नजर आती है, क्योंकि उसने हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं।”

‘खामोश ताकत’ का प्रदर्शन
इस पहल की एक अन्य समन्वयक दिव्या जैन ने कहा, “आज हमने जो देखा, वह खामोश ताकत थी—प्रार्थना, उपस्थिति और उद्देश्य। यह दिखाता है कि जागरूकता की शुरुआत सामने आने से होती है।”

आगे भी जारी रहेगा अभियान
आयोजकों ने जोर देकर कहा कि यह समन्वित राष्ट्रीय प्रयास कोई एक बार का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि एक लगातार चलने वाली पहल है, जिसका उद्देश्य हिंसा समाप्त होने तक जागरूकता, संवाद और नैतिक नेतृत्व को बढ़ावा देना है। इस मुद्दे पर 9 फरवरी को वॉशिंगटन डीसी में एक कांग्रेसनल सुनवाई भी प्रस्तावित है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विषय पर ध्यान और बढ़ने की उम्मीद है।

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