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भारत की जीडीपी 6.9% रहने का अनुमान, US ट्रेड डील से मिलेगी रफ्तार: रिपोर्ट

गोल्डमैन सैक्स ने अनुमान जताया है कि 2026 में हेडलाइन महंगाई दर 3.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब है।

 एआई तस्वीर। एआई तस्वीर। / IANS

भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 2026 में 6.9 प्रतिशत और 2027 में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इसके साथ ही हाल में हुए भारत–अमेरिका व्यापार समझौते से सालाना जीडीपी वृद्धि में करीब 0.2 प्रतिशत अंक (20 बेसिस प्वाइंट) की अतिरिक्त बढ़त मिल सकती है। यह अनुमान गोल्डमैन सैक्स रिसर्च की एक नई रिपोर्ट में जताया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “हमारे विश्लेषकों के अनुसार नए टैरिफ्स के चलते भारत की जीडीपी में सालाना आधार पर लगभग 0.2 प्रतिशत अंक की अतिरिक्त वृद्धि होगी, क्योंकि अमेरिका की अंतिम मांग के लिए भारत के वस्तु निर्यात का जोखिम जीडीपी के लगभग 4 प्रतिशत के बराबर है।”

यह भी पढ़ें- व्यापार समझौते से कृषि बाहर, अमेरिका संग डील भारत को देगी बड़ा फायदा

गोल्डमैन सैक्स ने अनुमान जताया है कि 2026 में हेडलाइन महंगाई दर 3.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब है।

गोल्डमैन सैक्स रिसर्च के मुख्य भारत अर्थशास्त्री शांतनु सेनगुप्ता के अनुसार, RBI ने पिछले साल ब्याज दरों में 125 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी और सिस्टम में तरलता बढ़ाने के लिए व्यापक कदम उठाए थे, ऐसे में आगे अतिरिक्त मौद्रिक ढील की गुंजाइश सीमित है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि “2025 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जबकि अमेरिका की ओर से एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में सबसे ज्यादा टैरिफ भारत पर लगाए गए थे। हालांकि, रिकॉर्ड कम महंगाई के कारण (महामारी को छोड़कर) नाममात्र जीडीपी वृद्धि छह साल के निचले स्तर पर रही।”

रिपोर्ट के मुताबिक, नीतिगत ब्याज दरों में कटौती, बैंकों के लिए नियामकीय ढील और कमजोर विनिमय दर के चलते भारत में वित्तीय हालात आसान हुए। वहीं आयकर और जीएसटी में कटौती से शहरी खपत में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिला, जबकि ग्रामीण खपत में मजबूती बनी रही।

बैंकिंग प्रणाली में 6.3 लाख करोड़ रुपये की तरलता डालने वाले उपायों से बैंक ऋण वृद्धि को समर्थन मिलेगा। रिपोर्ट के अनुसार, वास्तविक उपभोग वृद्धि 2025 के 7 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 7.7 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर रिपोर्ट में कहा गया है कि “2026 में ग्रामीण खपत मजबूत बनी रहने की संभावना है, जिसका आधार बेहतर शीतकालीन फसल और राज्यों द्वारा जारी कल्याणकारी खर्च होगा, खासकर उन राज्यों में जहां चुनाव होने वाले हैं।”

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