हरियाणा के पूर्व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जय प्रकाश दलाल / IANS
अमेरिका संग व्यापार समझौते को लेकर भारत में सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के नेता इस समझौते, खासकर कृषि क्षेत्र पर इसके असर को लेकर एक-दूसरे के बिल्कुल उलट राय रख रहे हैं। हरियाणा के भिवानी में मीडिया से बातचीत करते हुए राज्य के पूर्व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जय प्रकाश दलाल ने इस समझौते को भारत के लिए बेहद फायदेमंद बताया।
जय प्रकाश दलाल ने साफ कहा कि कृषि को इस व्यापार समझौते के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है इससे बेहतर सौदा हो ही नहीं सकता था। कृषि को पूरी तरह बाहर रखा गया है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौते के तहत किसी भी कृषि उत्पाद को नहीं खोला गया है। दलाल ने कहा, “चाहे गेहूं हो, चावल, गन्ना, चीनी, मक्का, ज्वार, बाजरा या फल—कुछ भी शामिल नहीं किया गया है। इसके बावजूद विपक्ष जनता को गुमराह कर रहा है।”
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आर्थिक पहलू पर जोर देते हुए दलाल ने कहा कि अमेरिका करीब 30 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी वाली दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, और उसके साथ व्यापारिक रिश्ते मजबूत होने से भारत को बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा, “भारत को जो डील मिली है, वह बांग्लादेश, वियतनाम या अन्य पड़ोसी देशों को मिली डील से कहीं बेहतर है। अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ भारत के समझौते भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को और तेज करेंगे।”
वहीं, दिल्ली में समाजवादी पार्टी प्रमुख और सांसद अखिलेश यादव ने इस व्यापार समझौते की कड़ी आलोचना की और इसे किसानों के लिए खतरा बताया। उन्होंने कहा, “असली खतरा किसानों के लिए है। अगर सब कुछ आयात होगा तो किसान क्या उगाएगा, क्या पैदा करेगा और उसे किस कीमत पर बेचा जाएगा?”
विपक्ष के आरोप
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा ने हमेशा किसानों के हितों के खिलाफ काम किया है। उन्होंने कहा, “पहले काले कृषि कानून लाए गए, जिन्हें किसानों ने मिलकर वापस करवा दिया। अब हर चीज बाहर से आएगी।” मोटे अनाज (मिलेट्स) के प्रचार का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने दावा किया कि इससे विदेशी देशों को भारत की मांग का अंदाजा लग गया। उन्होंने कहा, “यह भी सुनने में आ रहा है कि मिलेट्स के प्रचार से अमेरिका को पता चल गया कि भारत को बड़ी मात्रा में इसकी जरूरत है, इसलिए अब इसका आयात बढ़ेगा।”
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