दावोस में आईबीएम के सीईओ ने भारत में एआई संप्रभुता का आह्वान किया, जिसमें वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों पर ध्यान केंद्रित किया गया। / X@AshwiniVaishnaw
आईबीएम के चेयरमैन और सीईओ अरविंद कृष्णा ने कहा है कि भारत को अपनी 'एआई संप्रभुता' मजबूत करने के लिए सेमीकंडक्टर, एआई मॉडल बनाने और रियल लाइफ में इस्तेमाल होने वाले एप्लिकेशन पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने भारतीय उद्यमियों से कहा कि देश में ही मजबूत एआई क्षमताएं विकसित करना जरूरी है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक के दौरान दावोस में अरविंद कृष्णा ने कहा कि अब छोटे और खास कामों के लिए बने एआई मॉडल, बड़े एआई मॉडल के बराबर प्रदर्शन करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे छोटे एआई मॉडल आज करीब 95 प्रतिशत उपयोग में आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए असली बदलाव सेमीकंडक्टर, एआई मॉडल तैयार करने और उनके इस्तेमाल वाले एप्लिकेशन में होगा। यही क्षेत्र हैं जहां से भारत को बड़ी सफलता मिल सकती है।
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आईबीएम प्रमुख ने चीन के डीपसीक का उदाहरण देते हुए कहा कि एआई में सफलता कई बार असफल प्रयासों के बाद मिलती है। उन्होंने कहा कि भारत को हेल्थकेयर, डिफेंस और कानून जैसे क्षेत्रों के स्थानीय डेटा पर आधारित एआई सिस्टम बनाने चाहिए, ताकि देश की जरूरतों के मुताबिक एआई समाधान तैयार हो सकें। साथ ही उन्होंने नए प्रयोग करने और असफलता को स्वीकार करने की संस्कृति को जरूरी बताया।
इसी कार्यक्रम में केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियां अब तेजी से एआई की ओर बढ़ रही हैं, जिससे इस सेक्टर में रोजगार भी बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि भारत इस समय 12 एआई मॉडल विकसित कर रहा है, जिनमें से कम से कम 4 मॉडल जल्द लॉन्च किए जाएंगे।
आईटी मंत्री ने कहा कि भारत छोटे लेकिन खास सेक्टर के लिए बने एआई मॉडल पर ध्यान दे रहा है, जो अलग-अलग उद्योगों में उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे। उन्होंने बताया कि भारत ने 70 अरब डॉलर का निवेश एआई से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं में आकर्षित किया है, जिसमें गूगल और अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों के डेटा सेंटर भी शामिल हैं।
अश्विनी वैष्णव ने भारत के सेमीकंडक्टर प्रोग्राम में हो रही प्रगति की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देश में 10 सेमीकंडक्टर फैब प्लांट निर्माणाधीन हैं, 3 पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं और 4 यूनिट 2026 में व्यावसायिक रूप से काम शुरू करेंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा निजी क्षेत्र को परमाणु ऊर्जा उत्पादन में अनुमति देने से बड़े स्तर पर एआई कंप्यूटिंग के लिए जरूरी ऊर्जा मिल सकेगी।
एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। भारत की सेमीकंडक्टर मांग 2022 में 33 अरब डॉलर से बढ़कर 2030 तक 117 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है।
सरकार की 7,280 करोड़ रुपए की योजना, जो रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) के लिए है, भारत के सेमीकंडक्टर निर्माण को मजबूती देगी और जरूरी रणनीतिक कच्चे माल की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।
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