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विदेशी कंपनियों को टैक्स हॉलिडे के लिए करनी होंगी चार शर्तें पूरी

सूत्रों के अनुसार, विदेशी कंपनी का अधिसूचित होना आवश्यक है और भारत में जिस डेटा सेंटर कंपनी से डेटा सेंटर सेवाएं ली जा रही हैं, उसका भारतीय होना अनिवार्य है।

 भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण। / REUTERS/Francis Mascarenhas/File Photo

केंद्रीय बजट में डेटा और क्लाउड सेंटर कंपनियों के लिए कर छूट (टैक्स हॉलिडे) की घोषणा के बाद, वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने बुधवार को कहा कि विदेशी कंपनियों को कर छूट का पात्र होने के लिए चार आवश्यक शर्तों को पूरा करना होगा। सूत्रों ने कहा कि यह छूट कर वर्ष 2026-27 से लेकर कर वर्ष 2046-47 तक उस विदेशी कंपनी को उपलब्ध होगी, जो भारत सहित विश्व स्तर पर क्लाउड सेवाएं प्रदान करती है।

विदेशी कंपनी को छूट प्राप्त करने के लिए चार अनिवार्य शर्तें पूरी करनी होंगी। सूत्रों के अनुसार, विदेशी कंपनी का अधिसूचित होना आवश्यक है और भारत में जिस डेटा सेंटर कंपनी से डेटा सेंटर सेवाएं ली जा रही हैं, उसका भारतीय होना अनिवार्य है।

यह भी पढ़ें: बजट में कस्टम ड्यूटी राहत का US टैरिफ से कोई लिंक नहीं: वित्त मंत्री सीतारमण

अन्य शर्तों में यह भी शामिल है, "डेटा सेंटर का इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा अधिसूचित होना और विदेशी कंपनी द्वारा भारतीय उपयोगकर्ताओं को दी जाने वाली सेवाएं एक भारतीय पुनर्विक्रेता इकाई के माध्यम से प्रदान की जानी अनिवार्य हैं।"

सूत्रों के अनुसार, "यह छूट क्लाउड सेवाएं प्रदान करने के व्यवसाय में लगी विदेशी कंपनियों को निश्चितता प्रदान करती है, जो भारत में स्थित डेटा सेंटर से सेवाएं प्राप्त करती हैं। ऐसी विदेशी कंपनियों को इस बात का कोई जोखिम नहीं होगा कि उनकी वैश्विक आय पर भारत में कर लगाया जाए।"

सूत्रों के अनुसार, घरेलू आर्थिक गतिविधियों से होने वाली आय पर कर, जैसे कि रेजिडेंट डेटा सेंटर द्वारा वैश्विक इकाई को डेटा सेंटर सेवाएं प्रदान करना और रेजिडेंट पुनर्विक्रेता इकाई द्वारा भारतीय ग्राहकों को क्लाउड सेवाएं बेचना, किसी भी अन्य घरेलू कंपनी की तरह ही कर योग्य रहेगा।

हालांकि, यदि भारतीय डेटा सेंटर किसी विदेशी कंपनी की संबद्ध इकाई (कॉस्ट प्लस सेंटर) है, तो 15 प्रतिशत का सुरक्षित कर मार्जिन प्रदान किया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि विदेशी क्लाउड सेवा इकाई के साथ व्यवहार समान रहेगा, चाहे डेटा सेंटर भारतीय स्वामित्व वाला हो या वैश्विक इकाई की सहायक कंपनी, जिससे सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित होंगे।

भारतीय डेटा सेंटर अब आत्मविश्वास से ऐसी वैश्विक क्लाउड इकाइयों को अपनी सेवाएं प्रदान कर सकते हैं, और बाद वाली इकाइयों को भारतीय डेटा सेंटरों के उपयोग के कारण किसी भी प्रकार के कर जोखिम का सामना नहीं करना पड़ेगा।

इस कदम का उद्देश्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का विकास करना और डेटा सेंटरों में निवेश को बढ़ावा देना है।


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