भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण / IANS/Prem Nath Pandey
भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2 फरवरी को स्पष्ट किया कि बजट 2026-27 में घोषित कस्टम ड्यूटी में किए गए बदलाव भारत सरकार की जारी आर्थिक सुधार प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इनका अमेरिका की किसी भी नीति या टैरिफ फैसलों से कोई संबंध नहीं है।
वित्त मंत्री ने कहा, “हम काफी समय से हर बजट में कस्टम ड्यूटी में बदलाव करते आ रहे हैं और इस बजट में भी उसी प्रक्रिया को जारी रखा गया है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ये कदम भारतीय नागरिकों और कारोबार को समर्थन देने के व्यापक नीतिगत ढांचे के तहत उठाए गए हैं।
उन्होंने यह भी साफ किया कि बजट प्रस्ताव तैयार करते समय अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाए जाने के संभावित प्रभाव का कोई आकलन नहीं किया गया। सीतारमण ने कहा, “हमने अमेरिकी टैरिफ के असर का कोई मूल्यांकन नहीं किया और न ही उसे बजट निर्णयों में शामिल किया।”
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बजट में व्यक्तिगत उपयोग के लिए आयात किए जाने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में बताया कि कस्टम और केंद्रीय उत्पाद शुल्क से जुड़े प्रस्तावों का उद्देश्य टैरिफ ढांचे को सरल बनाना, घरेलू विनिर्माण को समर्थन देना, निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और ड्यूटी में मौजूद असंतुलन को दूर करना है।
मरीजों को राहत देने के लिए, खासकर कैंसर से पीड़ित लोगों के लिए, बजट में 17 दवाओं और औषधियों पर बेसिक कस्टम ड्यूटी से छूट का प्रस्ताव किया गया है। इसके अलावा, 7 और दुर्लभ बीमारियों को सूची में शामिल करने का प्रस्ताव है, ताकि इनके इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं, औषधियों और विशेष चिकित्सा प्रयोजनों के लिए खाद्य पदार्थों (FSMP) के व्यक्तिगत आयात पर ड्यूटी से छूट मिल सके।
केंद्रीय बजट में अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के दौरान सामान की बैगेज क्लीयरेंस से जुड़े नियमों में भी संशोधन का प्रस्ताव है, ताकि यात्रियों की वास्तविक चिंताओं का समाधान हो सके। नए नियमों से ड्यूटी-फ्री भत्ते बढ़ेंगे और अस्थायी रूप से लाए या ले जाए जाने वाले सामान को लेकर स्पष्टता आएगी।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि ईमानदार करदाता अब जुर्माने के बजाय एक अतिरिक्त राशि का भुगतान कर अपने बकाया निपटा सकेंगे और मामलों को समाप्त कर सकेंगे।
इसके साथ ही, बजट में कस्टम प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए कई कदम प्रस्तावित किए गए हैं, ताकि न्यूनतम हस्तक्षेप के साथ सामान की आवाजाही तेज हो, व्यापार को अधिक निश्चितता मिले और प्रक्रियाएं सुगम बनें।
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