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दावोस: केंद्रीय मंत्री ने की भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की अपील, नवाचार पर चर्चा

जोशी ने कहा कि भारत ने सोलर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम किया है और बड़े स्तर पर इन परियोजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने की क्षमता दिखाई है।

दावोस में प्रल्हाद जोशी / X@JoshiPralhad

भारत के केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) के दौरान दुनिया भर के निवेशकों से भारत के स्वच्छ और हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने की जोरदार अपील की है। 

उन्होंने कहा कि भारत ने सोलर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम किया है और बड़े स्तर पर इन परियोजनाओं को सफलतापूर्वक लागू करने की क्षमता दिखाई है।

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दावोस में केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कनाडा की कंपनी ला काइस के अध्यक्ष और सीईओ चार्ल्स एमोंड और सीओओ सारा बुशार्ड के साथ बैठक की, जिसमें भारत में लंबे समय के लिए जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े निवेश को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

जोशी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि बातचीत के दौरान सोलर, पवन और मिश्रित नवीकरणीय परियोजनाओं को बढ़ाने, बिजली ट्रांसमिशन व्यवस्था को मजबूत करने और ग्रीन हाइड्रोजन तथा ऊर्जा भंडारण के नए उपायों पर बात की गई।

उन्होंने पुरजोर सिफारिश की कि 'पार्टनर विद इंडिया' पहल को और बड़े स्तर पर बढ़ाया जाए, ताकि 2030 तक जलवायु कार्यों के लिए तय 400 अरब डॉलर के निवेश का फायदा भारत को मिल सके।

मंत्री ने कहा कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा योजनाएं और ला कैस की जलवायु निवेश रणनीति एक-दूसरे से मेल खाती हैं। दोनों का लक्ष्य ऐसे मजबूत और प्रभावी समाधान तैयार करना है, जो भारत को स्वच्छ ऊर्जा की ओर आगे बढ़ाने में मदद करें।

प्रल्हाद जोशी ने ओमान के उप प्रधानमंत्री के आर्थिक मामलों के कार्यालय के आर्थिक सलाहकार डॉ. सईद मोहम्मद अहमद अल सकरी के साथ भी बैठक की। इस बैठक में भारत और ओमान के बीच नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई।

उन्होंने बताया कि भारत ने सूखे और रेगिस्तानी इलाकों में भी सोलर, पवन, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है, जो वैश्विक निवेशकों के लिए अच्छे अवसर पैदा करता है।

दावोस में हुई चर्चाओं में सोलर मॉड्यूल, इलेक्ट्रोलाइजर और ग्रीन हाइड्रोजन के निर्माण और निर्यात में संयुक्त सहयोग पर भी ध्यान दिया गया। इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा से चलने वाले हाइड्रोजन हब, एकीकृत ऊर्जा परियोजनाओं और बंदरगाह आधारित निर्यात ढांचे में निवेश को बढ़ावा देने की बात कही गई।

मंत्री ने बताया कि भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए), संयुक्त निवेश कोष और इंटरनेशनल सोलर अलायंस के तहत सहयोग का इस्तेमाल कर वैश्विक ग्रीन एनर्जी ग्रिड, 'वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड (ओएसओडब्ल्यूओजी) जैसे अभियानों से जुड़ने पर भी चर्चा हुई।

इसके अलावा, आने वाले सोलर और पवन ऊर्जा टेंडरों में मिलकर भाग लेने और उद्योगों द्वारा नवाचार को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर भी बातचीत हुई।

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