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इलिनोइस चुनाव : भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार नायक अपने दम पर जुटा रहे हैं पैसा

मीडिया कहता है कि जिस तरह से नायक को चुनावी अभियान के लिए सहयोग मिल रहा है उसे देखते हुए लगता है कि यहां चंदा देने के लिहाज से भी एक हॉट सीट बन गई है। यानी चुनाव में पैसा भी 'बोलने' वाला है। 

 नायक शहर में एक निःशुल्क अस्थमा और एलर्जी क्लिनिक चलाते हैं। Image: Linkedln नायक शहर में एक निःशुल्क अस्थमा और एलर्जी क्लिनिक चलाते हैं। Image: Linkedln /

इलिनोइस राज्य सीनेट के लिए 20वें जिले से उम्मीदवार डॉ. डेव नायक ने अपने अभियान के लिए 40,000 डॉलर का दान दिया है। प्राइमरी में भारतीय-अमेरिकी डेमोक्रेट का  मुकाबला मौजूदा सीनेटर नताली टोरो और साथी चुनौती देने वाले ग्रेसिएला गुजमैन तथा गेरी योंकर से है।

सिटीजन नाम के यूजर की ओर से X पर एक पोस्ट से पता चलता है कि नायक को प्राप्त 577,000 डॉलर का चंदा मिला है और इसमें से 529,000 डॉलर उनके खुद के प्रयासों से ही आए हैं। 

स्थानीय मीडिया ने 20वीं जिला राज्य सीनेट सीट को सबसे कड़े मुकाबले वाली सीट बताया है। मीडिया कहता है कि जिस तरह से नायक को चुनावी अभियान के लिए सहयोग मिल रहा है उसे देखते हुए लगता है कि यहां चंदा देने के लिहाज से भी एक हॉट सीट बन गई है। यानी चुनाव में पैसा भी 'बोलने' वाला है। 

नायक शहर में एक निःशुल्क अस्थमा और एलर्जी क्लिनिक चलाते हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार पियोरिया के मूल निवासी नायक एक डाउनस्टेट फार्म के भी स्वामी हैं। यह फार्म इलिनोइस और आयोवा, मिसौरी तथा इंडियाना के कुछ हिस्सों में खाद्य बैंकों को हजारों पाउंड मकई दान करता है। 

उन्होंने एक राज्य कानून का समर्थन किया है जो बंदूक हिंसा से मारे गए बच्चों के परिवारों के लिए अंतिम संस्कार की लागत को कवर करने में मदद करता है। एक रिपोर्ट में नायक के हवाले से दावा किया गया है कि उन्होंने बहुत से लोगों की देखभाल की है, बहुतों को खाना खिलाया है और बहुतों का अंतिम संस्कार कराने में अपना नागरिक फर्ज निभाया है। 

कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में नायक ने कहा था कि वह इसलिए चुनाव मैदान में हैं क्योंकि समुदाय के जो लोग परेशानी में हैं और अन्याय से त्रस्त हैं वह उनकी पीड़ा समझते हैं। उनका मिशन यही है कि लोग चैन से जीवन जी सकें और दो वक्त की रोटी सुकून से हासिल कर पाएं। उनका कहना है कि मैं ऐसे लोगों को उम्मीद, प्यार और आस्था का आसरा देना चाहता हूं ताकि उन्हे लगे कि कोई उनकी भी परवाह करता है।

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