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एक विवाह ऐसा भी… दुल्हन लेकर आती है बारात, भारत में सदियों पुरानी 'जोजोड़ा' परंपरा

इस परंपरा को स्थानीय लोग सदियों से करते आ रहे हैं। इसे जोजोड़ा परंपरा कहा जाता है। आधुनिक दृष्टि से देखा जाए तो यह महिला सशक्तिकरण का आदर्श उदाहरण है।

शादी की तस्वीर (प्रतीकात्मक) / pexels

यह तो आम बात है... दूल्हा गाजे-बाजे के साथ बारात लेकर दुल्हन के घर आता है और उसे ब्याह (शादी) करके ले जाता है। या फिर दोनों परिवार किसी स्थान पर शादी करते हैं, लेकिन भारत के हिमालयी राज्य उत्तराखंड में ऐसी भी जगह है, जहां दुल्हन बारात लेकर दूल्हे के घर आती है। इस परंपरा को स्थानीय लोग सदियों से करते आ रहे हैं। इसे जोजोड़ा परंपरा कहा जाता है। आधुनिक दृष्टि से देखा जाए तो यह महिला सशक्तिकरण का आदर्श उदाहरण है।

हिमालयी राज्य उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हाल ही में संपन्न हुई एक अनोखी शादी चर्चा में है। देहरादून जिले के जौनसार-बावर क्षेत्र में दुल्हन खुद बारात लेकर दूल्हे के घर पहुंची। ढोल-नगाड़ों की धुन पर दुल्हन पक्ष के लोग झूमे, बारातियों का माला पहनाकर स्वागत हुआ और फिर पूरे रीति-रिवाज के साथ शादी की रस्में पूरी की गईं। पहली नज़र में यह सब आधुनिक सोच का नतीजा लगता है, लेकिन वास्तव में यह जौनसार की सदियों पुरानी परंपरा “जोजोड़ा विवाह” का हिस्सा है।

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अनोखी और आदर्श परंपरा

जौनसार की यह परंपरा अपने आप में अनोखी है। यहां शादी में लड़की का पक्ष बारात लेकर जाता है और दूल्हे के घर विवाह संस्कार संपन्न होते हैं। इसका उद्देश्य केवल परंपरा निभाना नहीं, बल्कि समाज में फिजूलखर्ची और दहेज जैसी कुरीतियों को रोकना भी है। जोजोड़ा विवाह में दहेज नहीं लिया जाता और ना ही शानो-शौकत का कोई दिखावा होता है। माना जाता है कि इस रीति से बेटी के परिवार पर आर्थिक बोझ नहीं पड़ता और विवाह एक सादगीपूर्ण सामाजिक उत्सव बना रहता है।

महिला सशक्तिकरण का उदाहरण

स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक, यह परंपरा महिला सशक्तिकरण की मिसाल भी है। जहां बाकी समाजों में दूल्हा लड़की के घर बारात लेकर जाता है, वहीं जौनसार में दुल्हन की बारात का स्वागत किया जाता है। इससे यह संदेश जाता है कि बेटी किसी बोझ नहीं, बल्कि गर्व का प्रतीक है। गांव की बुजुर्ग महिलाएं बताती हैं कि इस परंपरा के ज़रिए सदियों से जौनसार की बेटियों को सम्मान और बराबरी का दर्जा मिला है।

हालांकि, वक्त के साथ बदलाव भी दिख रहे हैं। नई पीढ़ी में कई परिवार अब पारंपरिक जोजोड़ा विवाह से हटकर आधुनिक शादियों की ओर रुख कर रहे हैं। महंगे रिसेप्शन, सजावट और खर्च बढ़ गए हैं। बावजूद इसके, कुछ परिवार अब भी अपनी इस सांस्कृतिक पहचान को बचाए हुए हैं। हाल ही में जौनसार में तीन ऐसे जोजोड़ा विवाह हुए जिन्होंने न केवल क्षेत्र की पुरानी परंपराओं को दोबारा चर्चा में ला दिया, बल्कि यह भी याद दिलाया कि बराबरी और सादगी से निभाए रिश्ते ही सबसे मजबूत होते हैं।

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