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US में धार्मिक स्वतंत्रता पर नया विवाद, दाढ़ी पर पाबंदी के खिलाफ भारतवंशी सांसदों ने उठाई आवाज

CAPAC के इस पत्र में कहा गया है कि नई नीति से सैनिकों के धार्मिक अधिकारों का हनन होगा।

CAPAC ने हेगसेथ से आदेश रोकने की अपील की। / Wikimedia commons

वॉशिंगटन डीसी में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ वॉर पीट हेगसेथ की नई ग्रूमिंग पॉलिसी, जिसमें दाढ़ी पर रोक लगाई गई है, को लेकर भारतीय मूल के सांसदों समेत 50 से ज्यादा अमेरिकी कांग्रेस सदस्यों ने विरोध जताया है।

कांग्रेसनल एशियन पैसिफिक अमेरिकन कॉकस (CAPAC) ने हेगसेथ को एक पत्र लिखकर इस नई नीति को तत्काल रोकने और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की है। इस पत्र पर भारतीय मूल के सांसद अमी बेरा, प्रमिला जयपाल, रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति और श्री थानेदार सहित 50 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। इस पत्र का समर्थन सिख कोएलिशन ने भी किया है।

धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा
CAPAC के इस पत्र में कहा गया है कि नई नीति से सैनिकों के धार्मिक अधिकारों का हनन होगा। खासकर सिख धर्म, इस्लाम और यहूदी धर्म के अनुयायियों के लिए दाढ़ी रखना धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है। CAPAC की अध्यक्ष ग्रेस मेंग ने कहा, हमारे देश के सैनिक बार-बार यह साबित कर चुके हैं कि वे अपने धार्मिक विश्वासों का सम्मान करते हुए उत्कृष्ट सेवा दे सकते हैं। उनके संवैधानिक अधिकारों को सीमित करना नैतिक विफलता है।

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हेगसेथ का बयान बना विवाद का कारण
30 सितंबर को वर्जीनिया के क्वांटिको में सैन्य कमांडरों को संबोधित करते हुए हेगसेथ ने कहा था, अब दाढ़ी, लंबे बाल या व्यक्तिगत दिखावे की कोई जगह नहीं — नो मोर बीर्डोज़। उनके इस बयान को कई धार्मिक समुदायों ने “अपमानजनक” करार दिया।

अदालतों के पुराने आदेश
पत्र में यह भी याद दिलाया गया कि अमेरिकी अदालतों ने पहले भी इस मुद्दे पर धार्मिक स्वतंत्रता के पक्ष में फैसले दिए हैं —
2022 में अदालत ने सिख रंगरूटों को दाढ़ी और पगड़ी के साथ ट्रेनिंग की अनुमति दी थी।
2011 में एक यहूदी रब्बी ने दाढ़ी रखने के अधिकार के लिए मुकदमा जीता था और सेना में बतौर चैपलिन सेवा जारी रखी थी।

धार्मिक स्वतंत्रता का संवैधानिक अधिकार
सांसदों ने कहा कि रिलिजियस फ्रीडम रिस्टोरेशन एक्ट (RFRA) यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी व्यक्ति अपनी धार्मिक मान्यताओं और करियर के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर न हो। उन्होंने कहा कि दाढ़ी रखना कोई “व्यक्तिगत फैशन” नहीं बल्कि “गहरी धार्मिक पहचान” का प्रतीक है।

बढ़ता विरोध और राजनीतिक प्रतिक्रिया
CAPAC के अलावा कांग्रेसी यहूदी कॉकस और ब्लैक कॉकस ने भी हेगसेथ के बयान की निंदा की है। वहीं रिपब्लिकन नेताओं, जिनमें उप राष्ट्रपति जे.डी. वांस भी शामिल हैं, ने हेगसेथ की नीति का समर्थन किया है।

क्या है आगे की स्थिति
हालांकि विरोध लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अब तक डिपार्टमेंट ऑफ वॉर ने नीति पर पुनर्विचार करने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। CAPAC और सिख कोएलिशन ने चेतावनी दी है कि यदि नीति लागू की गई तो यह धार्मिक अधिकारों पर सीधा हमला होगा और कानूनी चुनौती दी जाएगी।

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