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'हट सकता है कि भारत पर लगा US का अतिरिक्त टैरिफ', CEA नागेश्वरन का दावा

भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार अमेरिका और भारत के बीच जारी वार्ता के दौर को लेकर बड़ी उम्मीदें जताई हैं।

 वी अनंत नागेश्वरन वी अनंत नागेश्वरन / Adnan Abidi/ File Photo

भारत पर यूएस के अतिरिक्त टैरिफ का बोझ जल्द ही कम हो सकता है। यह दावा मुख्य आर्थिक सलाहकार अनंत वी.  नागेश्वरन ने किया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत पर व्यापार शुल्कों कटौती कर सकता है। 16 सितंबर को भारत और यूएस के अधिकारियों के बीच हुई वार्ता को उन्होंने सकारात्मक और भविष्य  में विकासको बढ़ावा देने वाला बताया। 

भारत के मुख्य अर्थशास्त्री सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने 18 सितंबर को कहा कि अमेरिका जल्द ही भारतीय वस्तुओं पर दंडात्मक आयात शुल्क हटा सकता है और साथ ही पारस्परिक शुल्क को मौजूदा 25 प्रतिशत से घटाकर 10-15 प्रतिशत कर सकता है।

कोलकाता में एक कार्यक्रम में नागेश्वरन ने कहा, "मुझे पूरा विश्वास है कि अगले कुछ महीनों में, यदि पहले नहीं तो, हम कम से कम 25 प्रतिशत के अतिरिक्त दंडात्मक शुल्क का समाधान देखेंगे। यह भी हो सकता है कि 25 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क भी उसी स्तर पर आ जाए, जिसकी हम पहले 10 प्रतिशत से 15 प्रतिशत के बीच की उम्मीद कर रहे थे।"

वहीं इस वार्ता को लेकर भारत ने यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा रूसी तेल खरीदने के लिए दक्षिण एशियाई देश पर दंडात्मक शुल्क लगाने के बाद एक सफलता की उम्मीद जगी है।

नागेश्वरन के बयान का असर
नागेश्वरन द्वारा व्यापार तनाव कम करने पर की गई टिप्पणियों के बाद भारतीय शेयर बाजार में तेज़ी देखी गई, बेंचमार्क निफ्टी 50 एक हफ़्ते के उच्चतम स्तर पर पहुँच गया और 9 जुलाई के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।

बता दें कि ट्रम्प ने 27 अगस्त से भारत पर 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क लगा दिया, जिससे कुल शुल्क दोगुना होकर 50% हो गया। यह यूक्रेन पर मास्को के आक्रमण को लेकर उस पर दबाव बढ़ाने के वाशिंगटन के प्रयासों का एक हिस्सा था। ट्रम्प और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उन्होंने 16 सितंबर को फ़ोन पर बात की थी और अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त करने में मोदी की मदद के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

दोनों में से किसी ने भी यूक्रेन पर किसी समझौते का विवरण नहीं दिया, लेकिन यह बातचीत अमेरिका-भारत तनाव के और कम होने का संकेत प्रतीत हुई, जो हाल के महीनों में बढ़ गया था और जिससे दोनों साझेदारों के बीच भविष्य के संबंधों पर सवाल उठने लगे थे, क्योंकि दोनों ही चीन को लेकर चिंतित हैं।
 

यह भी पढ़ें: फेंटेनाइल तस्करी मामला: US ने रद्द किए भारतीय अधिकारियों का वीजा

 

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