ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

भारत का बजट 2026: डायस्पोरा के लिए निवेश और भागीदारी का नया रोडमैप

तीन प्रमुख कर्तव्यों—तेज और सतत आर्थिक विकास, मानव क्षमता निर्माण और व्यापक सामाजिक समावेशन—पर आधारित यह बजट भारत के अगले आर्थिक चरण की मजबूत रूपरेखा पेश करता है।

प्रतीकात्मक तस्वीर / AI/IANS

भारत का केंद्रीय बजट 2026–27 ऐसे समय में पेश हुआ है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक उथल-पुथल और टूटी-बिखरी सप्लाई चेन के दौर से गुजर रही है। ऐसे माहौल में यह बजट सिर्फ सालाना आय-व्यय का दस्तावेज नहीं, बल्कि इस बात की स्पष्ट घोषणा है कि नई दिल्ली दुनिया में भारत की भूमिका को कैसे देखती है और वैश्विक पूंजी, प्रतिभा व विचारों—खासकर प्रवासी भारतीय समुदाय—के साथ अपने रिश्तों को किस दिशा में आगे बढ़ाना चाहती है।

तीन प्रमुख कर्तव्यों—तेज और सतत आर्थिक विकास, मानव क्षमता निर्माण और व्यापक सामाजिक समावेशन—पर आधारित यह बजट भारत के अगले आर्थिक चरण की मजबूत रूपरेखा पेश करता है। उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, डिजिटल व भौतिक अवसंरचना, स्वच्छ ऊर्जा, सेवाएं और लचीली वैश्विक सप्लाई चेन पर जोर यह संकेत देता है कि भारत खुद को एक बिखरती वैश्विक व्यवस्था में स्थिर और भरोसेमंद ग्रोथ इंजन के रूप में स्थापित करना चाहता है। भारतीय डायस्पोरा के लिए यह दृष्टिकोण निवेश, नवाचार, सहयोग और भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा में सक्रिय भागीदारी के नए अवसर खोलता है।

संरचनात्मक सुधार और वैश्विक जुड़ाव
बजट में किए गए संरचनात्मक सुधार भी उतने ही अहम हैं। कर प्रणाली में बदलाव, विदेशी निवेश नियमों का सरलीकरण, एनआरआई-केंद्रित ईज-ऑफ-लिविंग उपाय और भारत से वैश्विक स्तर पर काम करने वाली कंपनियों के लिए प्रोत्साहन—ये सभी भारत और दुनिया के बीच की दूरी को कम करने की दिशा में उठाए गए कदम हैं।

सरल टैक्स अनुपालन, रेमिटेंस नियमों का युक्तिकरण, आईटी और डेटा सेंटर्स के लिए लक्षित समर्थन और भरोसे-आधारित कस्टम्स सिस्टम यह दर्शाते हैं कि भारत प्रवासी भारतीयों और वैश्विक कारोबारियों के लिए अधिक सुगम, पारदर्शी और पूर्वानुमेय वातावरण बनाना चाहता है। ये फैसले सिर्फ मैक्रो-इकोनॉमिक परिणाम ही नहीं तय करते, बल्कि आत्मविश्वासी और सुधार-उन्मुख भारत के साथ डायस्पोरा के रिश्ते को भी नया आकार देते हैं।

कल्याण के साथ वित्तीय अनुशासन
करीब 80 करोड़ नागरिकों को मुफ्त खाद्यान्न, पेंशन और अन्य लाभों जैसी दुनिया की सबसे बड़ी सामाजिक कल्याण योजनाओं को जारी रखते हुए भी सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखा है। 2026–27 के लिए राजकोषीय घाटा GDP के 4.3% पर रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 4.4% से कम है। वहीं, कर्ज-GDP अनुपात घटकर 55.6% होने की राह पर है। यह संतुलित रणनीति दर्शाती है कि ब्याज बचत को उत्पादक आर्थिक गतिविधियों में दोबारा लगाया जा रहा है।

पहला कर्तव्य: विकास की रफ्तार तेज करना
पहला कर्तव्य विकास को तेज और टिकाऊ बनाने पर केंद्रित है। सात रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में विनिर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। बायोफार्मा SHAKTI पहल के तहत पाँच वर्षों में ₹10,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है। इसके अंतर्गत नए और उन्नत NIPER संस्थान तथा क्लिनिकल ट्रायल नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 के जरिए पूर्ण-स्टैक सेमीकंडक्टर क्षमताओं पर दोबारा जोर दिया गया है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए आवंटन बढ़ाया गया है। खनिज-समृद्ध राज्यों में रेयर अर्थ कॉरिडोर, नए केमिकल पार्क, उन्नत निर्माण व अवसंरचना उपकरण योजनाएं और कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम भारत के औद्योगिक आधार को मजबूत करते हैं।

MSMEs और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना में छोटे और मझोले उद्यम (SMEs) केंद्र में हैं। ₹10,000 करोड़ का SME ग्रोथ फंड और सेल्फ-रिलायंट इंडिया फंड के जरिए माइक्रो एंटरप्राइजेज को अतिरिक्त समर्थन दिया जाएगा, ताकि भविष्य के औद्योगिक चैंपियन तैयार हो सकें। इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया गया है। निजी निवेश को आकर्षित करने और परियोजनाओं के जोखिम को कम करने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर रिस्क गारंटी फंड जैसे नए तंत्र भी पेश किए गए हैं।

यह भी पढ़ें- भारत ने बांग्लादेश की वित्तीय सहायता में की कटौती, इन देशों के लिए बढ़ाया अपना बजट

क्रिएटिव इकोनॉमी, IT और वैश्विक निवेश
बजट नए विकास क्षेत्रों को भी पहचान देता है। ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ को AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब्स, यूनिवर्सिटी टाउनशिप और स्किलिंग पहलों के जरिए बढ़ावा मिलेगा। भारत के वैश्विक ग्रोथ इंजन आईटी सेक्टर को सरल सेफ हार्बर नियम, ऊंची थ्रेसहोल्ड और तेज प्राइसिंग एग्रीमेंट प्रक्रियाओं का लाभ मिलेगा। वैश्विक निवेश आकर्षित करने के लिए भारतीय डेटा सेंटर्स का उपयोग करने वाले क्लाउड सर्विस प्रोवाइडर्स को दीर्घकालिक टैक्स प्रोत्साहन, गैर-निवासी विशेषज्ञों के लिए छूट, और बॉन्डेड जोन्स में वेयरहाउसिंग, टूलिंग व मैन्युफैक्चरिंग के लिए अनुकूल कर व्यवस्थाएं घोषित की गई हैं।

व्यापार, निर्यात और ईज ऑफ लिविंग
केंद्रीय बजट 2026–27 का एक बड़ा फोकस व्यापार और लॉजिस्टिक्स ढांचे के आधुनिकीकरण पर है, ताकि सीमा-पार कारोबार तेज, भरोसेमंद और वैश्विक मानकों के अनुरूप हो सके। कस्टम्स प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, जहां कई सरकारी क्लीयरेंस एक ही ऑनलाइन विंडो में एकीकृत होंगी। रिस्क-आधारित और टेक्नोलॉजी-ड्रिवन सिस्टम—AI-आधारित स्कैनिंग, एडवांस इमेजिंग और न्यूनतम भौतिक हस्तक्षेप—देरी और लागत को कम करेंगे। निर्यातकों के लिए, खासकर MSMEs, कारीगरों, स्टार्ट-अप्स और डायस्पोरा-जुड़ी कंपनियों के लिए, कूरियर एक्सपोर्ट पर ₹10 लाख प्रति कंसाइनमेंट की सीमा हटाना एक बड़ा सुधार है। इससे ई-कॉमर्स के जरिए वैश्विक बाजारों तक पहुंच आसान होगी। मत्स्य क्षेत्र में भी निर्यात को बढ़ावा दिया गया है। भारतीय जहाजों द्वारा EEZ या खुले समुद्र में पकड़ी गई मछलियों को ड्यूटी-फ्री निर्यात माना जाएगा, जिससे वैश्विक सी-फूड वैल्यू चेन में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

प्रवासी भारतीयों के लिए सहूलियतें
अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और प्रवासी भारतीयों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा के बैगेज नियमों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। ड्यूटी-फ्री अलाउंस को मौजूदा यात्रा जरूरतों के अनुरूप बनाया जाएगा। ईमानदार टैक्सपेयर्स को लंबे विवादों से राहत देने के लिए मामूली अतिरिक्त भुगतान के बदले विवाद निपटाने का विकल्प भी दिया गया है, जिससे एनआरआई निवेशकों की अनुपालन थकान कम होगी।

डायस्पोरा को स्पष्ट संदेश
समग्र रूप से देखा जाए तो केंद्रीय बजट 2026–27 भारतीय डायस्पोरा को एक स्पष्ट संदेश देता है—भारत दुनिया के लिए खुला है, सुधारों के प्रति प्रतिबद्ध है, वित्तीय अनुशासन बनाए रखता है और वैश्विक जुड़ाव में मौजूद बाधाओं को कम करने के लिए गंभीर है। यह बजट प्रवासी भारतीयों को केवल प्रेक्षक या रेमिटेंस भेजने वाले नहीं, बल्कि भारत की विकास, नवाचार और राष्ट्रीय परिवर्तन की यात्रा में दीर्घकालिक साझेदार के रूप में आमंत्रित करता है।

लेखक एक प्रसिद्ध स्तंभकार हैं। वह ‘तालिबान: वार एंड रिलिजन इन अफगानिस्तान’ सहित 15 से अधिक पुस्तकों के लेखक हैं।

(यह लेख लेखक के निजी विचारों पर आधारित है और आवश्यक नहीं कि यह ‘न्यू इंडिया अब्रॉड’ के आधिकारिक विचारों का प्रतिनिधित्व करता हो।)

न्यू इंडिया अब्रॉड की अन्य खबरों को पढ़ने के लिए क्लिक करें।

Comments

Related