ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

खालिस्तानी चरमपंथियों को संरक्षण देने में कनाडा के नक्शेकदम पर UK, रिपोर्ट में चेतावनी

रिपोर्ट में ब्रिटिश अखबार द गार्जियन में प्रकाशित एक लेख का हवाला देते हुए कहा गया है कि उसमें परमजीत सिंह पम्मा को भारत द्वारा कथित ‘ट्रांसनेशनल दमन’ का शिकार बताकर सहानुभूतिपूर्ण रूप में पेश किया गया।

खालिस्तानी ध्वज / IANS

एक रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यूनाइटेड किंगडम (UK) कथित खालिस्तानी चरमपंथियों को संरक्षण देने के मामले में कनाडा के विवादित रास्ते पर आगे बढ़ता दिख रहा है, जिसके गंभीर वैश्विक परिणाम हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे तत्वों को शरण देना न केवल आतंकवाद को बढ़ावा देता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को कमजोर करने और निर्दोष लोगों की जान को खतरे में डालने का भी कारण बन सकता है।

‘खालसा वॉक्स’ में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि खालिस्तानी उग्रवाद का इतिहास हिंसा और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़ा रहा है। रिपोर्ट में ब्रिटेन से आग्रह किया गया है कि वह वांछित खालिस्तानी आतंकियों, जैसे परमजीत सिंह पम्मा, को प्रत्यर्पित कर न्याय के सिद्धांतों को प्राथमिकता दे, न कि कनाडा की तरह राजनयिक अलगाव की राह अपनाए, जो अंततः राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचाती है।

रिपोर्ट में ब्रिटिश अखबार द गार्जियन में प्रकाशित एक लेख का हवाला देते हुए कहा गया है कि उसमें परमजीत सिंह पम्मा को भारत द्वारा कथित ‘ट्रांसनेशनल दमन’ का शिकार बताकर सहानुभूतिपूर्ण रूप में पेश किया गया, जो न केवल भ्रामक है बल्कि पूरी तरह निराधार भी है।

यह भी पढ़ें- कनाडा के इतिहास की सबसे बड़ी चोरी, 20 मिलियन डॉलर के सोना चोरी में मास्टरमाइंड अरेस्ट

रिपोर्ट के मुताबिक, पम्मा कोई निर्दोष कार्यकर्ता नहीं है, बल्कि उस पर बम धमाकों और हत्याओं जैसे गंभीर अपराधों के आरोप हैं और उसका नाम लंबे समय से खालिस्तानी उग्रवाद से जुड़ा रहा है। उसे शरण देना और घर की सुरक्षा बढ़ाने की सलाह देना यह संकेत देता है कि UK भी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर चरमपंथियों को संरक्षण देने के कनाडाई मॉडल को अपनाता जा रहा है।

रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि क्या UK वैश्विक सुरक्षा और न्याय की कीमत पर राजनीतिक गठजोड़ और प्रवासी वोट बैंक को प्राथमिकता दे रहा है।

खालसा वॉक्स की रिपोर्ट में खालिस्तान आंदोलन के हिंसक इतिहास की भी याद दिलाई गई है। इसमें कहा गया है कि खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा किया गया सबसे घातक हमला 1985 में एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुआ बम धमाका था, जिसमें 329 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकांश कनाडाई नागरिक थे। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में खालिस्तान को कोई समर्थन नहीं है, लेकिन इसके समर्थकों ने कनाडा और अब तेजी से UK जैसे देशों में पनाह ली है।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पम्मा के कथित कृत्य केवल आरोपों तक सीमित नहीं हैं। उसके संबंध प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से बताए गए हैं, जो एयर इंडिया बम धमाके के लिए जिम्मेदार रहा है। पम्मा पर BKI के लिए फंड जुटाने और हिंसक गतिविधियों के लिए धन मुहैया कराने में अहम भूमिका निभाने का भी आरोप है।

रिपोर्ट के अनुसार, द गार्जियन के लेख में इस पृष्ठभूमि को नजरअंदाज करते हुए पम्मा के उन दावों पर जोर दिया गया, जिनमें उसने ‘हिंदू राष्ट्रवादियों’ से खतरे की बात कही। हालांकि, UK पुलिस की जांच में इन आरोपों के संबंध में कोई मामला दर्ज नहीं हुआ।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पम्मा का सुरक्षा के नाम पर परिवार से अलग रहना और खुद को पीड़ित के रूप में पेश करना, उन रणनीतियों की याद दिलाता है, जिनका इस्तेमाल अन्य उग्रवादी भी जांच से बचने के लिए करते रहे हैं। रिपोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि खालिस्तानी तत्वों ने खुद हिंसा भड़काई है, जिसमें 2023 में लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग पर खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारियों द्वारा किया गया हमला भी शामिल है।

न्यू इंडिया अब्रॉड की अन्य खबरों को पढ़ने के लिए क्लिक करें।

Comments

Related

To continue...

Already have an account? Log in

Create your free account or log in