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पीएम मोदी ने कहा- ट्रम्प की ‘अमेरिका फर्स्ट’ भावना मेरे ‘इंडिया फर्स्ट’ विचार से मेल खाती है...

16 मार्च को जारी तीन घंटे के पॉडकास्ट इंटरव्यू में भारत के प्रधानमंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ अपने संबंधों, चीन और पाकिस्तान पर भारत के कूटनीतिक रुख, AI के भविष्य और 2002 के गुजरात दंगों पर चर्चा की।

पॉडकास्ट के दौरान पीएम मोदी। / Youtube/Lex Fridman

लेक्स फ्रिडमैन पॉडकास्ट पर सबसे प्रतीक्षित बातचीतों में से एक में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की दृढ़ता की प्रशंसा की। पॉडकास्ट में उन्होंने ट्रम्प की 'अमेरिका फर्स्ट' विचारधारा और उनके स्वयं के 'इंडिया फर्स्ट' विजन के बीच समानता को रेखांकित किया।

सितंबर 2024 में ट्रम्प पर हुए जानलेवा हमले के बारे में मोदी ने कहा- गोली लगने के बाद भी वह अमेरिका के लिए अडिग रहे। उनका जीवन उनके राष्ट्र के लिए था। उनके प्रतिबिंब ने उनकी अमेरिका फर्स्ट भावना को दिखाया, ठीक वैसे ही जैसे मैं राष्ट्र प्रथम में विश्वास करता हूं।

मोदी ने 2019 में 'हाउडी मोदी' कार्यक्रम के लिए ह्यूस्टन की अपनी यात्रा के दौरान उनकी दोस्ती को याद किया जहां ट्रम्प भारतीय अमेरिकियों से भरे स्टेडियम में उनके साथ सहजता से कदमताल कर रहे थे।

मोदी ने याद किया-  बिना किसी हिचकिचाहट के वह सहमत हो गए और मेरे साथ चलने लगे। उनकी पूरी सुरक्षा व्यवस्था चौंक गई। लेकिन मेरे लिए वह क्षण वास्तव में दिल को छू लेने वाला था। इसने मुझे दिखाया कि इस आदमी में साहस है।

मोदी ने अमेरिकी इतिहास के प्रति ट्रम्प की गहरी प्रशंसा को लेकर भी बात की। व्हाइट हाउस में अपनी पहली मुलाकात के दौरान ट्रम्प ने सुरक्षा प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए व्यक्तिगत रूप से उनका मार्गदर्शन किया। ट्रम्प के राष्ट्रपति पद के प्रति सम्मान का वर्णन करते हुए मोदी ने याद किया कि उन्होंने खुद ही चीजों को इंगित किया... यह वह जगह है जहां अब्राहम लिंकन रहते थे।

फरवरी 2025 में वॉशिंगटन की अपनी यात्रा के बारे में मोदी ने कहा कि एलन मस्क, विवेक रामास्वामी और तुलसी गबार्ड जैसी हस्तियों के साथ बैठकों में 'परिवार जैसा माहौल' था।

जब उनसे पूछा गया कि ट्रम्प ने उन्हें 'कठोर और बेहतर वार्ताकार' कहा है तो मोदी ने इस टिप्पणी को हल्का किया। मोदी ने कहा कि यह उनकी शालीनता और विनम्रता है। लेकिन बातचीत के मामले में मैं हमेशा अपने देश के हितों को सबसे पहले रखता हूं। इसीलिए हर मंच पर, मैं भारत के हितों के लिए बोलता हूं। किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि सकारात्मक तरीके से। और इस वजह से कोई भी बुरा नहीं मानता।  

मोदी का ट्रम्प के लिए यह समर्थन ऐसे समय पर आया है जब भारत अमेरिकी टैरिफ के खतरे से जूझ रहा है और वॉशिंगटन के साथ अप्रैल में होने वाली व्यापार वार्ता से अनुकूल परिणाम की उम्मीद कर रहा है।

मस्क, विवेक और तुलसी से मुलाकात
हाल ही में अमेरिका की अपनी यात्रा के दौरान मोदी ने इलॉन मस्क, जेडी वेंस, तुलसी गबार्ड और विवेक रामास्वामी सहित कई प्रमुख हस्तियों से भी मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि वहां एक परिवार जैसा माहौल था। हर कोई अपने परिवार के साथ आया था।

मोदी ने मस्क के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों और भारत में शासन को सुव्यवस्थित करने के अपने प्रयासों के बीच समानताएं बताईं। उन्होंने कहा जब मैंने 2014 में पदभार संभाला था तो मैं अपने देश को गहरी अकुशलता से मुक्त करना चाहता था। मैंने सरकारी कल्याण योजनाओं से 100 मिलियन फर्जी या डुप्लिकेट नाम हटा दिए जिससे लगभग 3 खरब रुपयों की बचत हुई।

गुजरात दंगे
वर्ष 2002 के गुजरात दंगों को लेकर मोदी ने दावा किया कि उन्हें (दंगों को) इतिहास में सबसे खराब माना जाना एक 'गलत सूचना' है। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल से पहले राज्य में लगातार सांप्रदायिक हिंसा के इतिहास की ओर इशारा किया।

मोदी ने कहा- यह धारणा कि ये अब तक के सबसे बड़े दंगे थे, वास्तव में गलत सूचना है। यदि आप 2002 से पहले के आंकड़ों की समीक्षा करते हैं तो आप देखेंगे कि गुजरात में लगातार दंगे हुए, कहीं न कहीं लगातार कर्फ्यू लगाया जा रहा था। पतंग उड़ाने की प्रतियोगिता या यहां तक कि मामूली साइकिल टक्कर जैसे मामूली मुद्दों पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क सकती थी।

उन्होंने दावा किया- 2002 से पहले गुजरात में 250 से अधिक दंगे हुए। 1969 में दंगे लगभग छह महीने तक चले। हालांकि मोदी ने 2002 की त्रासदी को स्वीकार किया लेकिन इसे व्यापक ऐतिहासिक संदर्भ में रखते हुए कहा कि वे शांति और व्यवस्था के पक्षधर हैं।

चीन और पाकिस्तान के साथ संबंध
मोदी ने कहा कि भारत और चीन के बीच संबंध कोई नई बात नहीं है। दोनों देशों की संस्कृति और सभ्यताएं प्राचीन हैं। उन्होंने बताया कि कैसे दोनों देशों ने ऐतिहासिक रूप से वैश्विक समृद्धि में योगदान दिया है। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय में, 'भारत और चीन अकेले ही दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद का 50% से अधिक हिस्सा थे।' मोदी ने जोर देकर कहा कि प्रतिस्पर्धा संघर्ष में बदलने के बजाय 'स्वस्थ और स्वाभाविक' बनी रहनी चाहिए।

पाकिस्तान के साथ भारत के संबंधों के बारे में मोदी ने विभाजन और उसके बाद के दर्दनाक इतिहास को याद किया। उन्होंने कहा कि दुख और खामोश आंसुओं से दबे दिलों के साथ, भारतीयों ने इस दर्दनाक वास्तविकता को अपनाया। उन्होंने इसके बाद हुए रक्तपात का वर्णन किया।

उन्होंने पाकिस्तान पर शांति के बजाय शत्रुता को चुनने का आरोप लगाया। कहा कि उन्होंने हमारे खिलाफ एक छद्म युद्ध छेड़ दिया है। इसे विचारधारा के रूप में न समझें। किस तरह की विचारधारा रक्तपात और आतंक के निर्यात पर पनपती है? मोदी ने 9/11 सहित वैश्विक आतंकवादी हमलों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि पाकिस्तान आतंकवाद का केंद्र बना हुआ है। जब भी कहीं कोई आतंकी घटना होती है उसके तार पाकिस्तान से जुड़ते हैं। अमेरिका में 9/11 कांड का दोषी ओसामा भी पाकिस्तान में ही मिला।

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