अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप / IANS
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ संघर्ष खत्म होने के करीब है। उन्होंने कहा कि ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी पूरी तरह लागू हो चुकी है और उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते तनाव के बीच तेहरान को काफी नुकसान पहुंचा है।
व्हाइट हाउस में फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई का बड़ा असर हुआ है। उन्होंने कहा कि यह काफी आश्चर्यजनक रहा है… हमने उन्हें पूरी तरह तबाह कर दिया है। अंतिम परिणाम ही मायने रखता है और यह जल्द सामने आ सकता है।
उन्होंने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने देना ही मुख्य लक्ष्य है। अब ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सकता। अगर ईरान ऐसा करता है तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। अमेरिका के पास और कार्रवाई करने की क्षमता है। अमेरिका चाहे तो ईरान के पुल और बिजली संयंत्र नष्ट कर सकता है।
लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ऐसा नहीं करना चाहता क्योंकि भविष्य में पुनर्निर्माण करना होगा। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है। ईरान के पास अब नौसेना और वायुसेना नहीं बची है। अब उसके पास एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम और रडार भी नहीं हैं। उन्होंने मौजूदा नेतृत्व को नया और अपेक्षाकृत व्यवहारिक बताया।
वैश्विक प्रतिक्रिया पर उन्होंने कहा कि किसी बड़े देश ने विरोध नहीं किया। चीन और सऊदी अरब की ओर से कोई आपत्ति नहीं आई। वहीं आर्थिक असर पर ट्रंप ने कहा कि थोड़े समय के लिए असर होगा। यह कुछ हफ्तों तक रह सकता है लेकिन इसके बाद अर्थव्यवस्था तेजी से सुधरेगी।
उन्होंने तेल की कीमतों का जिक्र किया और कहा कि संकट के बावजूद कीमतें उम्मीद से कम हैं। संघर्ष खत्म होने के बाद कीमतें और गिरेंगी और पेट्रोल की कीमतें भी जल्द कम होंगी। ट्रंप ने शेयर बाजार को लेकर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि संघर्ष खत्म होने के बाद बाजार में तेजी आएगी।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने रिपब्लिकन विधेयक का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इससे बिना डेमोक्रेट समर्थन के फैसले लिए जा सकते हैं। उन्होंने टैक्स में राहत की बात भी कही और कहा कि टिप्स, सोशल सिक्योरिटी और ओवरटाइम पर टैक्स नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि लोगों को रिफंड मिलना शुरू हो गया है। कुछ लोगों को हजारों डॉलर वापस मिल रहे हैं।
ट्रंप ने इंटरव्यू के दौरान सीमा सुरक्षा को भी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि विधेयक को छोटा रखा जा रहा है ताकि इसे पास किया जा सके।
आपको बता दें कि यह बयान ऐसे समय आया है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसमें किसी भी बाधा का असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है।
अमेरिका लंबे समय से कहता रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देना चाहिए। इस पर कई पश्चिमी देश भी सहमत हैं। जबकि ईरान ने हमेशा कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बना रहा है लेकिन इस मुद्दे पर तनाव समय-समय पर बढ़ता रहा है।
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