ग्रीनलैंड / REUTERS/Sarah Meyssonnier
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की इच्छा जताई है। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया है कि आखिर डेनमार्क का इस आर्कटिक द्वीप पर कानूनी अधिकार है भी या नहीं। ट्रम्प के इस बयान के बाद ग्रीनलैंड के इतिहास, उसकी स्वायत्तता, स्वतंत्रता की संभावनाओं और वहां अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को लेकर बहस तेज हो गई है।
डेनमार्क को ग्रीनलैंड कैसे मिला?
ग्रीनलैंड में सबसे पहले करीब 2500 ईसा पूर्व एशिया और उत्तरी अमेरिका से आए इनुइट समुदाय बसे। वर्ष 985 ईस्वी में वाइकिंग नेता एरिक द रेड के नेतृत्व में यूरोपीय बसावट शुरू हुई, लेकिन 1400 के आसपास इनुइट संस्कृति हावी हो गई और वाइकिंग्स लुप्त हो गए।
18वीं सदी में डेनमार्क ने ग्रीनलैंड को उपनिवेश बनाया। 1721 में मिशनरी हांस एगेडे के आगमन को औपनिवेशिक युग की शुरुआत माना जाता है। आज भी राजधानी नूक में एगेडे की प्रतिमा मौजूद है, जिसे कई ग्रीनलैंडवासी अपनी खोई हुई इनुइट पहचान का प्रतीक मानते हैं।
1916 में अमेरिका ने डेनमार्क से डेनिश वेस्ट इंडीज (अब यूएस वर्जिन आइलैंड्स) खरीदे। इसी समझौते में अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर डेनमार्क की संप्रभुता को औपचारिक मान्यता दी।
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ग्रीनलैंड की मौजूदा स्थिति
1953 में ग्रीनलैंड को डेनमार्क के संविधान के तहत औपचारिक क्षेत्र बनाया गया, हालांकि स्थानीय लोगों से कोई परामर्श नहीं लिया गया। 2009 से ग्रीनलैंड को व्यापक स्वशासन प्राप्त है और वह जनमत संग्रह के जरिए स्वतंत्रता की घोषणा कर सकता है, जिसके लिए डेनमार्क की संसद की मंजूरी जरूरी होगी।
हालांकि विदेश नीति और रक्षा जैसे अहम मामले अब भी डेनमार्क के अधीन हैं। करीब 57 हजार की आबादी वाले इस क्षेत्र में सीमित बुनियादी ढांचा है और 17 कस्बों के बीच कोई सड़क संपर्क नहीं है।
डेनमार्क-ग्रीनलैंड संबंधों में तनाव
बीते वर्षों में सामने आए ऐतिहासिक खुलासों से दोनों के रिश्तों में खटास आई है। 1950 के दशक में इनुइट समुदाय को जबरन विस्थापित किया गया और उनकी भाषा व संस्कृति को हाशिए पर डाल दिया गया। 2022 में डेनमार्क ने बच्चों को जबरन डेनमार्क भेजने के प्रयोग के लिए माफी मांगी।
इसके अलावा 1966 से 1991 के बीच हजारों महिलाओं और किशोरियों को बिना सहमति गर्भनिरोधक उपकरण लगाए जाने का मामला सामने आया, जिसके लिए 2025 में डेनमार्क ने औपचारिक माफी दी।
यूरोपीय संघ और अमेरिका से संबंध
ग्रीनलैंड 1973 में डेनमार्क के जरिए यूरोपीय समुदाय में शामिल हुआ, लेकिन 1985 में स्वशासन मिलने के बाद बाहर निकल गया। फिलहाल उसका ईयू से विशेष मत्स्य समझौता है।
अमेरिका की यहां 1951 के समझौते के तहत पिटुफिक एयर बेस पर स्थायी सैन्य मौजूदगी है। डेनमार्क खुद ग्रीनलैंड की रक्षा करने में सक्षम नहीं है, इसलिए वह नाटो के तहत अमेरिकी सुरक्षा पर निर्भर है।
ट्रम्प ग्रीनलैंड क्यों चाहते हैं?
ट्रम्प का कहना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम है। यूरोप से उत्तरी अमेरिका का सबसे छोटा मार्ग यहीं से गुजरता है, जिससे यह मिसाइल अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम के लिए रणनीतिक बनता है। इसके अलावा आर्कटिक क्षेत्र में रूस, चीन और नाटो की बढ़ती गतिविधियों के बीच ग्रीनलैंड भू-राजनीतिक केंद्र बन गया है।
ग्रीनलैंड की जनता क्या चाहती है?
सर्वेक्षणों के मुताबिक, अधिकांश ग्रीनलैंडवासी सिद्धांत रूप में स्वतंत्रता के पक्ष में हैं, लेकिन आर्थिक निर्भरता के कारण जल्दबाजी से बचना चाहते हैं। मत्स्य उद्योग 90 फीसदी से ज्यादा निर्यात का स्रोत है, जबकि डेनमार्क की सब्सिडी से सार्वजनिक बजट का आधा हिस्सा चलता है।
डेनमार्क और ग्रीनलैंड का रुख
ट्रम्प के पहले कार्यकाल में द्वीप खरीदने के प्रस्ताव को डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने “बेतुका” करार दिया था। दिसंबर 2025 में उन्होंने और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने दोहराया कि ग्रीनलैंड का विलय संभव नहीं है और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा इसके लिए बहाना नहीं बन सकती।
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