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न्यू यॉर्क से कैलिफोर्निया तक हिंदू विरोधी हिंसा, श्री थानेदार ने फिर से प्रस्ताव पेश किया

अमेरिका में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ते भेदभाव और हिंदूफोबिया पर कांग्रेस के सदस्य श्री थानेदार ने चिंता जताई है। उन्होंने H.Res. 69 नाम के एक प्रस्ताव को दोबारा पेश किया है। इसमें अमेरिका में रहने वाले हिंदुओं के योगदान की तारीफ करते हुए उनके साथ हो रहे भेदभाव को रोकने की अपील की गई है।

 सांसद श्री थानेदार ने सबसे पहले 10 अप्रैल, 2024 को हिंदूफोबिया और हिंदुओं के खिलाफ भेदभाव की निंदा करने वाला प्रस्ताव पेश किया था।  सांसद श्री थानेदार ने सबसे पहले 10 अप्रैल, 2024 को हिंदूफोबिया और हिंदुओं के खिलाफ भेदभाव की निंदा करने वाला प्रस्ताव पेश किया था। / Image- File Photo

अमेरिका में कांग्रेस के सदस्य श्री थानेदार ने हिंदूफोबिया और हिंदुओं के खिलाफ भेदभाव की निंदा करते हुए H.Res. 69 बाईपार्टिसन प्रस्ताव दोबारा पेश किया है। इसमें अमेरिका में रहने वाले हिंदुओं के योगदान को उजागर किया गया है। इसके साथ ही उनके साथ होने वाले भेदभाव के बारे में जागरूकता बढ़ाने की बात कही गई है। 

थानेदार ने कहा, 'किसी भी तरह की नफरत हमारे समाज की बुनियाद को कमजोर करती है। हिंदूफोबिया की निंदा करके ये प्रस्ताव साफ संदेश देता है कि हम भेदभाव बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम उस विविधता का जश्न मनाते रहेंगे जो हमारे समुदायों को मजबूत बनाती है।'

ये प्रस्ताव पूरे देश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा को उजागर करने के साथ ही न्यू यॉर्क से लेकर कैलिफोर्निया तक की घटनाओं का जिक्र करता है। ये प्रस्ताव ये भी कहता है कि अमेरिका एक ऐसा देश है जो हिंदू अमेरिकियों द्वारा लाई गई विविधता का स्वागत करता है। हिंदू धर्म के सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक योगदान को पहचानता है। 

थानेदार ने कहा, 'अपने साथियों के लगातार द्विदलीय समर्थन से मुझे उम्मीद है कि हम इस मुद्दे के प्रति जागरूकता ला पाएंगे। अमेरिका विचारों और संस्कृति की विविधता पर बना देश है। हमें कभी भी नफरत के फैलाव को इस देश को महान बनाने वाली बातों को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं देनी चाहिए।' 

सांसद श्री थानेदार ने सबसे पहले 10 अप्रैल, 2024 को हिंदूफोबिया और हिंदुओं के खिलाफ भेदभाव की निंदा करने वाला प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव को 23 सांसदों का द्विदलीय समर्थन मिला। इनमें राजा कृष्णमूर्ति, रो खन्ना, अमी बेरा और प्रमिला जयपाल जैसे प्रतिनिधि शामिल हैं। इस प्रस्ताव को फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज जैसे कई संगठनों का भी समर्थन हासिल है।

 

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