सीनेटर श्मिट / X/@Eric_Schmitt
अमेरिकी सीनेटर एरिक श्मिट ने H-1B वीजा प्रोग्राम की आलोचना फिर से शुरू की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इसमें भारत से आए नकली एकेडमिक डॉक्यूमेंट्स के जरिए बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी हो रही है।
'X' पर कई पोस्ट में, मिसौरी के रिपब्लिकन नेता ने कहा कि भारत में अधिकारियों ने नकली डिग्री का एक बड़ा रैकेट पकड़ा है। इसमें "यूनिवर्सिटी" बताए जाने वाले 28 संस्थानों से 1,00,000 से अधिक नकली सर्टिफिकेट जब्त किए गए। उन्होंने दावा किया कि एक रैकेट ने लगभग 36,000 नकली डिग्रियां बेचीं, जिनकी कीमत हर एक के लिए सिर्फ $1,400 थी।
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Authorities busted a massive fake-degree racket: 100k+ counterfeit certificates seized from 28 “universities” in India.
— Senator Eric Schmitt (@SenEricSchmitt) June 9, 2026
One mill sold 36k fakes for as little as $1,400 each.
This would violate 18 USC 1546(a). It's time to prosecute those who broke the law. pic.twitter.com/hb7I2FunHi
श्मिट ने लिखा कि H-1B प्रोग्राम इस गलत काम को बढ़ावा देता है। इसमें धोखाधड़ी और गलत इस्तेमाल बहुत ज्यादा है। उन्होंने तर्क दिया कि बहुत कुशल विदेशी कर्मचारियों के लिए बने वीजा पाने के लिए नकली कागजात का इस्तेमाल किया जा रहा है।
श्मिट ने कुछ ऐसे पैटर्न की ओर भी इशारा किया जिनमें स्टाफिंग फर्म, नकली अनुभव पत्र और चेतावनी के संकेतों के बावजूद वीजा मंजूरी की ज्यादा दरें शामिल थीं। उन्होंने उदाहरण के तौर पर कैलिफोर्निया के इरविन में एक ऑफिस का जिक्र किया, हालाँकि उन्होंने पोस्ट में ज्यादा जानकारी नहीं दी।
सीनेटर ने कहा कि H-1B वीजा के लिए लगभग 70 प्रतिशत आवेदन भारत से आते हैं और तर्क दिया कि प्रोग्राम के लिए जरूरी खास डिग्री की वजह से कागजात की जांच बहुत जरूरी हो जाती है। उन्होंने लिखा- नकली कागजात = पहले दिन से ही धोखाधड़ी वाला वीजा।
श्मिट ने मानव भारती यूनिवर्सिटी से जुड़े आरोपों का जिक्र किया, जिस पर भारत में नकली डिग्रियां जारी करने को लेकर जांच चल रही है।
उन्होंने विदेशी शैक्षणिक कागजात की व्यवस्थित रूप से जांच न करने के लिए अमेरिकी आव्रजन अधिकारियों की आलोचना की और कहा कि सरकार यह पता लगाने में नाकाम रही कि कितने H-1B लाभार्थियों ने जांच के दायरे में आए संस्थानों से डिग्रियां हासिल की हैं।
उन्होंने आगे तर्क दिया कि अहम बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में बिना जांच वाली योग्यताएं बड़े जोखिम पैदा कर सकती हैं। उन्होंने इस मुद्दे को कई पश्चिमी देशों को प्रभावित करने वाला "अंतर्राष्ट्रीय संकट" बताया।
श्मिट ने नकली कागजात के जरिए वीजा पाने वाले लोगों पर मुकदमा चलाने की मांग की और धोखाधड़ी के खिलाफ मजबूत सुरक्षा उपायों के बिना वीजा प्रोसेसिंग को तेज करने की मांगों पर सवाल उठाए।
हर साल H-1B वीजा पाने वालों में सबसे अधिक संख्या भारतीयों की होती है। अमेरिकी सरकार के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय नागरिकों को लगातार सबसे ज्यादा मंजूर हुए H-1B वीजा मिले हैं, खासकर टेक्नोलॉजी सेक्टर में, जहां नियोक्ता इस प्रोग्राम का इस्तेमाल खास कामों के लिए कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए करते हैं।
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