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अमेरिका की वेनेजुएला पर कार्रवाई के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन

ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर बड़े पैमाने पर हमला कर राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को “पकड़” लिया है।

वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले से भारत में गुस्सा। / IANS

अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर की गई सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी को हिरासत में लिए जाने के विरोध में रविवार को कई वाम दलों ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया।

सीपीआई(एम) नेतृत्व ने इस कार्रवाई को “साम्राज्यवादी सैन्य आक्रमण” करार देते हुए अमेरिका की कड़ी निंदा की और केंद्र सरकार से इस कदम के खिलाफ स्पष्ट व सख्त रुख अपनाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि अमेरिका ने वेनेजुएला पर हमला वहां के तेल संसाधनों पर कब्जा करने के इरादे से किया है।

यह विरोध प्रदर्शन उस बयान के बाद हुआ, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास पर बड़े पैमाने पर हमला कर राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को “पकड़” लिया है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि संक्रमणकाल के दौरान अमेरिका वेनेजुएला का प्रशासन संभालेगा।

इस बीच, मादुरो शनिवार देर रात (स्थानीय समय) न्यूयॉर्क पहुंचे, जहां उन्हें अमेरिकी आपराधिक मामलों का सामना करना है। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पैम बॉन्डी द्वारा सार्वजनिक किए गए आरोपपत्र में मादुरो पर लंबे समय से चल रहे नार्को-आतंकवाद और कोकीन तस्करी नेटवर्क का नेतृत्व करने का आरोप लगाया गया है। यह आरोपपत्र न्यूयॉर्क के साउदर्न डिस्ट्रिक्ट की संघीय अदालत में दाखिल किया गया है।

यह भी पढ़ें- ट्रम्प का वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को हिरासत में लेना युद्ध छेड़ने जैसा: जोहरान ममदानी

अभियोजन पक्ष का दावा है कि मादुरो ने करीब दो दशकों तक राज्य सत्ता का इस्तेमाल कर अमेरिका की ओर भारी मात्रा में कोकीन भेजी। उन पर नार्को-आतंकवाद की साजिश, कोकीन आयात की साजिश, हथियारों से जुड़े अपराध और अन्य गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कथित तौर पर ये गतिविधियां 1999 से शुरू होकर 2025 तक जारी रहीं।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सीपीआई(एम), सीपीआई, सीपीआई(एमएल), आरएसपी और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह अमेरिका की “आक्रामक कार्रवाई” की आलोचना करने वाले देशों के साथ खड़ी हो और वेनेजुएला के प्रति एकजुटता दिखाए।

सीपीआई(एम) के महासचिव एम.ए. बेबी, सीपीआई के डी. राजा, सीपीआई(एमएल) के दीपांकर भट्टाचार्य, एआईएफबी के जी. देवराजन और आरएसपी के मनोज भट्टाचार्य ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि अमेरिका की यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर का “खुला उल्लंघन” है और एक संप्रभु देश पर सीधा हमला है।

संयुक्त बयान में कहा गया, “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने संबोधन में वेनेजुएला के तेल भंडार पर कब्जा करने की बात कहकर इस आक्रमण के पीछे की असली मंशा उजागर कर दी है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने तो यहां तक चेतावनी दी कि क्यूबा और मैक्सिको उनके अगले निशाने हो सकते हैं।”

वाम दलों ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका मोनरो सिद्धांत के ट्रम्प संस्करण को लागू करना चाहता है, जिसके तहत पूरे पश्चिमी गोलार्ध को अपना प्रभाव क्षेत्र मानकर दखलअंदाजी की जाती है।

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