पीएम मोदी और व्लादिमीर पुतिन / IANS/Kremlin
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आवास को निशाना बनाए जाने की खबरों पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने और शांति स्थापित करने का सबसे कारगर रास्ता कूटनीतिक प्रयास ही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा, “रूसी संघ के राष्ट्रपति के आवास को निशाना बनाए जाने की खबरों से गहरी चिंता है। जारी कूटनीतिक प्रयास ही संघर्ष समाप्त करने और शांति हासिल करने का सबसे व्यवहारिक मार्ग हैं। हम सभी संबंधित पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे इन्हीं प्रयासों पर ध्यान केंद्रित रखें और ऐसे किसी भी कदम से बचें, जो इन्हें कमजोर कर सकता है।”
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने आरोप लगाया कि यूक्रेन ने 29 दिसंबर की तड़के राष्ट्रपति पुतिन के सरकारी आवास को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया। रूसी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, लावरोव ने कहा कि रूस इस हमले का जवाब देगा।
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लावरोव के मुताबिक, 28 और 29 दिसंबर की रात को “कीव शासन” ने 91 लंबी दूरी के हमलावर ड्रोन के जरिए नोवगोरोद क्षेत्र में स्थित रूसी राष्ट्रपति के सरकारी आवास पर “आतंकी हमला” किया। हालांकि, रूस की वायु रक्षा प्रणालियों ने सभी ड्रोन को मार गिराया और किसी के हताहत होने या संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत तेज़ होने की खबरें हैं। इसी कड़ी में रविवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से “अच्छी और बेहद उपयोगी” टेलीफोन बातचीत की है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी पुतिन और ट्रम्प के बीच हुई इस बातचीत की पुष्टि की। वहीं, ट्रम्प ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के साथ फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो आवास पर हुई मुलाकात को “शानदार” बताते हुए कहा कि यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने की दिशा में शांति वार्ता “काफी नज़दीक” पहुंच चुकी है।
रिपोर्टरों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा, “हमने लगभग हर विषय पर चर्चा की है और युद्ध समाप्त करने की दिशा में काफी प्रगति हुई है।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती इन कूटनीतिक गतिविधियों के बीच प्रधानमंत्री मोदी का बयान एक बार फिर भारत की उस नीति को रेखांकित करता है, जिसमें संवाद और कूटनीति को संघर्ष समाधान का सबसे प्रभावी माध्यम माना गया है।
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