मौलाना मसूद अजहर / FIle photo IANS
पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) गाजा संकट का बहाना बनाकर आतंकी ढांचे के पुनर्निर्माण और भारत के खिलाफ गतिविधियों के लिए नए कैडर की भर्ती में जुटे हैं। एक रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।
एथेंस स्थित थिंक टैंक जियोपोलिटिको की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की एजेंसियों ने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की निगरानी में मौजूद खामियों की पहचान कर ली है और इसी के बाद आतंकी फंडिंग के तौर-तरीकों में बदलाव किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन जेईएम और एलईटी गाजा के लिए राहत सहायता के नाम पर धन जुटा रहे हैं, जिसे आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा रहा है। खास बात यह है कि इस फंडिंग नेटवर्क में जेईएम प्रमुख मसूद अजहर के परिवार के सदस्यों की सीधी भूमिका सामने आई है।
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रिपोर्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय दबाव और एफएटीएफ की कार्रवाई से बचने के लिए ये संगठन अब बैंक खातों की बजाय डिजिटल वॉलेट, ईज़ीपैसा, क्रिप्टोकरेंसी और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए चंदा जुटा रहे हैं। यह धन धार्मिक कार्यों और गाजा राहत के नाम पर एकत्र किया जा रहा है, लेकिन इसका इस्तेमाल आतंकी ढांचे के पुनर्निर्माण, मस्जिदों के निर्माण और भारत विरोधी गतिविधियों में किया जा रहा है।
जियोपोलिटिको ने दावा किया कि 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठनों को फंड जुटाने का एक नया बहाना मिल गया। मसूद अजहर का बेटा हम्माद अजहर और भाई तल्हा अल-सैफ इस फंडिंग अभियान की अगुवाई कर रहे हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ये संगठन 1990 के दशक से ही खाड़ी देशों और पश्चिमी देशों में बसे पाकिस्तानी प्रवासी नेटवर्क के जरिए फर्जी चैरिटी संगठनों के माध्यम से धन जुटाते रहे हैं, जिसका बड़ा हिस्सा जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता फैलाने और 2008 के मुंबई हमलों जैसे बड़े आतंकी हमलों में इस्तेमाल हुआ।
रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और एफएटीएफ से पाकिस्तान में आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने की अपील की है, ताकि भविष्य में भारतीय उपमहाद्वीप में किसी बड़े संकट को रोका जा सके।
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