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NAS ने सुभाष खोत को 2026 हेल्ड पुरस्कार से किया सम्मानित

यह पुरस्कार 1,00,000 डॉलर की राशि के साथ दिया जाता है और हर साल कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध के लिए दिया जाता है, खासकर कॉम्बिनेटोरियल और डिस्क्रीट ऑप्टिमाइजेशन जैसे क्षेत्रों में।

सुभाष खोत / McArthur Foundation

भारतीय मूल के कंप्यूटर वैज्ञानिक सुभाष खोत को 2026 का माइकल और शीला हेल्ड पुरस्कार दिया गया है। यह सम्मान 26 अप्रैल को नेशनल अकैडमी ऑफ साइसेंज यानी NAS की 163वीं वार्षिक बैठक के मौक पर दिया गया है। इस पुरस्कार के अन्य विजेताओं में इरित दिनूर, गाय किंडलर, डोर मिन्जर और मुली साफ्रा शामिल हैं।

यह पुरस्कार 1,00,000 डॉलर की राशि के साथ दिया जाता है और हर साल कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध के लिए दिया जाता है, खासकर कॉम्बिनेटोरियल और डिस्क्रीट ऑप्टिमाइजेशन जैसे क्षेत्रों में। इन वैज्ञानिकों को '2-टू-2 गेम्स थ्योरम' पर उनके काम के लिए सम्मानित किया गया है जिसने सैद्धांतिक कंप्यूटर विज्ञान में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

यह शोध कई वर्षों की मेहनत और नए गणितीय तरीकों के जरिए विकसित किया गया। इसे यूनिक गेम्स कंजेक्चर के लिए अब तक का सबसे मजबूत प्रमाण माना जा रहा है जो इस क्षेत्र की एक महत्वपूर्ण और अनसुलझी समस्या है।

नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज के अनुसार इस शोध ने 'हार्डनेस ऑफ एप्रॉक्सिमेशन' और 'प्रोबेबिलिस्टिकली चेकबल प्रूफ्स' जैसे विषयों की समझ को बदल दिया है। इसका असर ग्राफ थ्योरी से जुड़े कई समस्याओं, जैसे वर्टेक्स कवर और ग्राफ कलरिंग पर भी पड़ता है।

माइकल और शीला हेल्ड पुरस्कार की स्थापना 2017 में की गई थी। यह पुरस्कार पिछले आठ वर्षों के भीतर प्रकाशित शोध कार्यों को मान्यता देता है। इसका पहला पुरस्कार 2018 में प्रसाद राघवेंद्र और डेविड स्ट्यूरर को दिया गया था।

सुभाष खोत न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के कूरांट इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमेटिकल साइंसेज में कंप्यूटर विज्ञान के प्रोफेसर हैं। उन्होंने 1999 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे से कंप्यूटर विज्ञान में स्नातक किया और 2003 में प्रिंसटन विश्वविद्यालय से पीएचडी पूरी की, जहां उनके मार्गदर्शक संजीव अरोड़ा थे।

उन्हें पहले भी कई बड़े सम्मान मिल चुके हैं, जिनमें एलन टी. वाटरमैन अवॉर्ड, यूनिक गेम्स कंजेक्चर पर काम के लिए नेवलिन्ना पुरस्कार और मैकआर्थर फेलोशिप शामिल हैं। उन्हें 2017 में रॉयल सोसाइटी का फेलो और 2023 में नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज का सदस्य चुना गया था।

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