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स्कूल विरोध बिल पर वीटो को लेकर कोमाटिरेड्डी ने की आलोचना

वीटो के बाद जारी बयान में कोमाटिरेड्डी ने कहा कि इस फैसले से छात्रों की सुरक्षा कमजोर हुई है और यह नागरिक अधिकारों से जुड़े बड़े मुद्दे को भी प्रभावित करता है।

Saritha Komatireddy and Zohran Mamdani / X (Saritha Komatireddy) and Wikimedia commons

न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल पद की उम्मीदवार सरिता कोमाटिरेड्डी ने 24 अप्रैल को मेयर जोहरान ममदानी के उस फैसले की आलोचना की जिसमें उन्होंने स्कूलों के पास विरोध प्रदर्शन को सीमित करने वाले बिल पर वीटो लगा दिया। उन्होंने इसे छात्रों की सुरक्षा के लिए झटका बताया।

वीटो के बाद जारी बयान में कोमाटिरेड्डी ने कहा कि इस फैसले से छात्रों की सुरक्षा कमजोर हुई है और यह नागरिक अधिकारों से जुड़े बड़े मुद्दे को भी प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि हर जाति और धर्म के छात्रों को सुरक्षित तरीके से स्कूल जाने देना अमेरिका की नागरिक अधिकार परंपरा का हिस्सा है। आज मेयर ने उसी परंपरा से मुंह मोड़ लिया।

उन्होंने न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। कोमाटिरेड्डी ने कहा कि और हमारी अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स की तरफ से एक शब्द भी नहीं आया जिनकी जिम्मेदारी जनता की सुरक्षा करना है। यह शर्मनाक है।

बता दें कि मेयर ममदानी ने जिस कानून पर वीटो लगाया उसे इंट्रो 175-बी कहा जाता है। इसे न्यूयॉर्क सिटी काउंसिल ने पास किया था। इस बिल के तहत पुलिस को स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के पास विरोध प्रदर्शनों के लिए नियम तय करने और उन्हें सार्वजनिक करने का निर्देश दिया जाना था।

24 अप्रैल को दिए अपने बयान में ममदानी ने कहा कि उन्होंने इस प्रस्ताव की समीक्षा की, लेकिन इसमें संवैधानिक चिंताएं हैं। उन्होंने कहा कि समस्या यह है कि इस बिल में शैक्षणिक संस्थानों की परिभाषा बहुत व्यापक है और इससे लोगों के विरोध प्रदर्शन के मूल अधिकार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बिल का दायरा सिर्फ स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा। 

ममदानी ने कहा कि जैसे यह बिल लिखा गया है, इसके तहत विश्वविद्यालय, संग्रहालय और शिक्षण अस्पताल भी प्रतिबंधों के दायरे में आ सकते हैं। इससे जुड़े एक अन्य प्रस्ताव को पर्याप्त समर्थन मिला और उसे वीटो नहीं किया गया। उसमें धार्मिक स्थलों के आसपास सुरक्षा क्षेत्र बनाने की बात थी।

कोमाटिरेड्डी ने इस मुद्दे को सार्वजनिक सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन की बड़ी बहस का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि जहां कानून के तहत अधिकारों की रक्षा जरूरी है, वहीं छात्रों को किसी भी तरह की बाधा या खतरे से बचाना भी उतना ही जरूरी है।

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