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ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में भारत-अमेरिकी संबंधों को नया आयाम देगा जयशंकर का दौरा

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के अमेरिका दौरे से पहले विदेश सचिव विक्रम मिश्री और राजदूत विनय क्वात्रा ने अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात कर आगामी वार्ता की नींव रखी। जयशंकर के इस दौरे से भारत-अमेरिका के रिश्तों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

 विदेश सचिव मिश्री, राजदूत क्वात्रा, डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर मैनेजमेंट एंड रिसोर्सेज रिचर्ड आर वर्मा और डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट कर्ट कैंपबेल की मुलाकात। विदेश सचिव मिश्री, राजदूत क्वात्रा, डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर मैनेजमेंट एंड रिसोर्सेज रिचर्ड आर वर्मा और डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट कर्ट कैंपबेल की मुलाकात। / X/@DepSecStateMR

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के अमेरिका दौरे से पहले भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने अमेरिक के ऊंचे अधिकारियों के साथ अहम बातचीत की। इन मुलाकातों ने आने वाली मीटिंग्स का रास्ता साफ किया। मिश्री और अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट कर्ट कैंपबेल और डिप्टी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट फॉर मैनेजमेंट एंड रिसोर्सेज रिचर्ड आर वर्मा से मुलाकात की। 

उनकी बातचीत ने दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों को रेखांकित किया। इसके साथ ही आपसी विश्वास, साझा मूल्यों और समृद्धि के प्रति प्रतिबद्धता पर जोर दिया। एक्स (पहले ट्विटर) पर वर्मा ने लिखा, 'भारत के विदेश सचिव विक्रम मिश्री और अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा का स्टेट डिपार्टमेंट में कैंपबेल के साथ स्वागत करते हुए बहुत खुशी हुई। हम आपसी भरोसे, साझा मूल्यों और सबके लिए तरक्की पर आधारित भारत-अमेरिकी संबंधों को मजबूत करने के लिए और काम करने को बेताब हैं।'

डॉ. एस जयशंकर 24 से 29 दिसंबर तक अमेरिका का दौरा करेंगे। इससे दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। इस दौरे में जयशंकर अपने अमेरिकी समकक्षों से मुलाकात करेंगे। जरूरी द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बात करेंगे। ये दौरा इसलिए भी अहम है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प के राष्ट्रपति चुनाव जीतने के बाद भारत और अमेरिका के बीच ये पहला ऊंचे स्तर का राजनयिक संपर्क है। इससे ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में अमेरिका-भारत के रिश्तों के विकास की नींव रखी जाएगी। उसके लिए मंच तैयार किया जाएगा। 

इस राजनयिक आदान-प्रदान को दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का एक अहम कदम माना जा रहा है। इसमें साझा चुनौतियों का समाधान और सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर जाेर दिया जाएगा। 

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