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जस्टिस यशवंत वर्मा पर भारतीय संसद में जांच समिति, ‘कैश-एट-होम’ केस की पड़ताल

अगर समिति अपनी रिपोर्ट में जज को दोषी पाती है, तो प्रस्ताव लोकसभा और राज्यसभा में वोट के लिए लाया जाएगा।

जस्टिस यशवंत वर्मा /

भारतीय संसद में मंगलवार को न्यायपालिका से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम देखने को मिला। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने ‘कैश-एट-होम’ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ तीन सदस्यीय जांच समिति के गठन का ऐलान किया।

यह कदम उस आगजनी घटना से जुड़ा है जो मार्च 2025 में जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास पर हुई थी। आग बुझाने पहुंचे दमकल कर्मियों को वहां स्टोर रूम में जली और अधजली मुद्रा के बंडल मिले थे। उस समय वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में जज थे। उन्होंने इन पैसों की जानकारी से इनकार किया था और कहा था कि स्टोर रूम कई लोगों की पहुंच में था।

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महाभियोग प्रस्ताव के बाद समिति का गठन
स्पीकर ने यह समिति 146 सांसदों (सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों) द्वारा हस्ताक्षरित महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार करने के बाद गठित की। समिति में सुप्रीम कोर्ट के जज अरविंद कुमार, मद्रास हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनींद्र मोहन श्रीवास्तव और कर्नाटक हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता बी.वी. आचार्य शामिल हैं। जांच समिति को सबूतों की समीक्षा, गवाहों से जिरह और अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपने का काम सौंपा गया है। जब तक रिपोर्ट नहीं आती, महाभियोग प्रस्ताव लंबित रहेगा।
 

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