भारत और जापान में द्विपक्षीय संबंध / IANS/X/@DrSJaishankar
चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच भारत और जापान के संबंध और गहरे होते जा रहे हैं। हाल ही में जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी की भारत यात्रा को द्विपक्षीय रिश्तों में “कार्यान्वयन चरण” की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें दूरदर्शी समझौतों को जमीन पर उतारने पर जोर दिया गया। एक रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच विविध साझेदारियों के माध्यम से भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत कर रहा है और किसी एक शक्ति पर निर्भरता कम करते हुए मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक सिद्धांतों को आगे बढ़ा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार के दबाव या जबरदस्ती को रोका जा सके।
‘इंडिया नैरेटिव’ में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी की 15 से 17 जनवरी 2026 तक भारत यात्रा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती देने का संकेत है। तीन दिवसीय इस दौरे के दौरान उच्च स्तरीय वार्ताओं और प्रतीकात्मक पहलों के जरिए भारत ने क्षेत्रीय आक्रामकता, खासकर चीन की ओर से बढ़ते दबाव के खिलाफ अपने गठबंधनों को मजबूत करने का स्पष्ट संदेश दिया।
रिपोर्ट के अनुसार, इस यात्रा की शुरुआत 16 जनवरी को विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ 18वें भारत-जापान विदेश मंत्रिस्तरीय रणनीतिक संवाद से हुई। इस दौरान अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की गई। उसी यात्रा में ‘अगले दशक के लिए जापान-भारत संयुक्त दृष्टिकोण’ को अपनाया गया था, जिसमें सुरक्षा, आर्थिक लचीलापन, नवाचार और सांस्कृतिक सहयोग जैसे अहम पहलुओं को शामिल किया गया है।
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18वें रणनीतिक संवाद के प्रमुख परिणामों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर एक नए संवाद तंत्र की शुरुआत और महत्वपूर्ण खनिजों पर संयुक्त कार्य समूह का गठन शामिल है। इस कार्य समूह में दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा, मोतेगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिष्टाचार भेंट भी की, जिसमें आर्थिक सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, निवेश और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मोतेगी की यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की समुद्री आक्रामकता और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर उसके नियंत्रण से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों को और मजबूत करती है। क्वाड ढांचा—जिसमें भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं—इस दिशा में एक अहम मंच के रूप में उभर रहा है, जो नियम आधारित व्यवस्था पर आधारित मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक (FOIP) को बढ़ावा देता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मोतेगी द्वारा आर्थिक सुरक्षा पर दिया गया जोर भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के साथ मेल खाता है। इसके तहत सेमीकंडक्टर, बैटरी और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में कमजोरियों को कम करने के लिए जापानी तकनीक के हस्तांतरण पर ध्यान दिया जा रहा है। रक्षा क्षेत्र में इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने के लिए यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना (UNICORN) जैसी तकनीकों का भी उल्लेख किया गया है।
व्यापक भू-राजनीतिक संदर्भ में रिपोर्ट में कहा गया है कि मोतेगी की भारत यात्रा—जो 2026 में उनकी पहली विदेश यात्रा का हिस्सा थी और इससे पहले इजरायल, कतर और फिलीपींस की यात्राओं के बाद हुई—प्रधानमंत्री साने ताकाइची के नेतृत्व में जापान की सक्रिय कूटनीति को दर्शाती है। भारत के लिए यह यात्रा इस बात का संकेत है कि टोक्यो, बीजिंग की आक्रामक नीतियों के मुकाबले एक भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार और संतुलनकारी शक्ति के रूप में उभर रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत-जापान साझेदारी केवल द्विपक्षीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जी20, जी4 और संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंचों तक फैली हुई है, जहां दोनों देश वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार की साझा पैरवी कर रहे हैं।
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