खालिस्तानी झंडा / Courtesy: IANS
भारत ने 8 दिसंबर को ब्रिटेन सरकार द्वारा खालिस्तानी चरमपंथी संगठनों पर की गई सख्त कार्रवाई का स्वागत किया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करेगा और दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को और आगे बढ़ाएगा।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि ब्रिटेन के कदम से अवैध धन के प्रवाह और अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। उनसे जब बब्बर खालसा के गुरप्रीत सिंह रेहल और बब्बर अकाली लहर समूह पर की गई कार्रवाई के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम यूके सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का स्वागत करते हैं। ये कदम आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ वैश्विक प्रयासों को मजबूत करते हैं और अवैध आर्थिक गतिविधियों पर लगाम लगाने में मदद करते हैं। ऐसे लोग न केवल भारत और यूके के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं। जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत उम्मीद करता है कि दोनों देश आतंकवाद-विरोधी सहयोग को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।
यूके ने लगाए कड़े प्रतिबंध
4 दिसंबर को यूके ट्रेजरी ने गुरप्रीत सिंह रेहल की संपत्तियों को फ्रीज करने और उन्हें निदेशक पदों से अयोग्य घोषित करने की घोषणा की। रेहल पर आरोप है कि वह भारत में सक्रिय आतंकी संगठनों का हिस्सा है। इसके साथ ही ब्रिटेन ने बब्बर अकाली लहर नामक समूह की संपत्तियां भी फ्रीज कर दीं।
यूके ट्रेजरी के अनुसार रेहल और बब्बर अकाली लहर पर हथियार खरीदने, भर्ती करने, धन उपलब्ध कराने और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने के आरोप हैं। ब्रिटेन में मौजूद इन दोनों के सभी खातों पर अब रोक लगा दी गई है और कोई भी व्यक्ति या संस्था उन्हें धन या कोई आर्थिक सुविधा नहीं दे सकेगी।
भारत और यूके के बीच पहले भी उठ चुका है मुद्दा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के बीच 2025 में मुंबई में हुई मुलाकात में भी खालिस्तानी चरमपंथ का मुद्दा अहम रहा था। भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने बताया कि पीएम मोदी ने साफ कहा था कि कट्टरपंथ और हिंसक चरमपंथ के लिए लोकतांत्रिक समाजों में कोई जगह नहीं है और ऐसी गतिविधियों के खिलाफ कानूनी ढांचे के भीतर कार्रवाई जरूरी है।
जुलाई 2025 में ब्रिटेन की यात्रा के दौरान भी पीएम मोदी ने खालिस्तानी तत्वों पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि
चरमपंथी विचारधारा वाले लोगों को लोकतांत्रिक आजादी का दुरुपयोग नहीं करने दिया जा सकता। जो लोग लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश करते हैं उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
यह बयान उस समय आया था जब लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग पर खालिस्तानी समर्थकों द्वारा किए गए हमले को लेकर भारत की चिंता बढ़ गई थी। भारत का मानना है कि ब्रिटेन द्वारा हाल में की गई कार्रवाई दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को नई मजबूती देगी और चरमपंथी गतिविधियों पर लगाम लगाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।
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