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UN में भारत ने पाकिस्तान को 'आतंकवादी देश' बताया, कहा- वैश्विक समुदाय चुप्पी तोड़े 

संयुक्त राष्ट्र में भारत की डेप्युटी स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने आतंकवाद का खुला समर्थन करने के पाकिस्तान के 'कबूलनामे' को लेकर उसे 'आतंकवादी देश' करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से चुप्पी तोड़ने की अपील की।

 संयुक्त राष्ट्र में भारत की डेप्युटी स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल। संयुक्त राष्ट्र में भारत की डेप्युटी स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल। / X

संयुक्त राष्ट्र में भारत की डेप्युटी स्थायी प्रतिनिधि योजना पटेल ने आतंकवाद का खुला समर्थन करने के पाकिस्तान के 'कबूलनामे' को लेकर उसे 'आतंकवादी देश' करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से चुप्पी तोड़ने की अपील की। पटेल ने यह बात संयुक्त राष्ट्र में 'विक्टिम्स ऑफ टेररिज्म एसोसिएशन नेटवर्क' के लॉन्च पर कही।

पटेल ने कहा, 'पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने हाल के एक टीवी इंटरव्यू में खुलेआम माना कि उनका देश दशकों से आतंकी संगठनों को ट्रेनिंग, फंडिंग और समर्थन देता आया है। यह कबूलनामा किसी को हैरान नहीं करता, बल्कि पाकिस्तान को एक ऐसे आतंकी देश के तौर पर बेनकाब करता है जो पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर रहा है। दुनिया अब आंखें मूंदकर नहीं बैठ सकती।' 

पटेल की यह तीखी आलोचना संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के आरोपों के जवाब में आई, जब कुछ दिन पहले ही जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में एक भीषण आतंकी हमले में 26 पर्यटकों को मौत के घाट उतार दिया गया था। पटेल ने कहा, 'पहलगाम हमले के बाद दुनिया भर के नेताओं और सरकारों ने भारत को जो साफ-साफ समर्थन दिया, वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय के आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस को दिखाता है।'

उन्होंने कहा कि यह हमला 26/11 मुंबई हमले के बाद से भारत में सबसे ज्यादा नागरिक मौतों वाली घटना है। 'दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार होने के नाते, भारत इन हमलों का पीड़ितों, उनके परिवारों और समाज पर पड़ने वाले लंबे असर को समझता है।' 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के हवाले से पटेल ने जोर देकर कहा, 'आतंकवाद के अपराधियों, संगठनों, फंडिंग करने वालों और समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया जाए और उन्हें सजा दी जाए। आतंकवाद के कृत्य चाहे किसी भी मकसद से हों, कहीं भी, कभी भी और किसी के भी द्वारा किए गए हों, अपराधी और अनैतिक हैं।'

उन्होंने 'विक्टिम्स ऑफ टेररिज्म एसोसिएशन' के गठन को एक अहम कदम बताते हुए कहा कि यह पीड़ितों को अपनी आवाज उठाने और समर्थन पाने का मंच देगा। उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि ऐसे प्रयास आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक जवाबी कार्रवाई को मजबूत करेंगे और पीड़ितों को हमारे प्रयासों का केंद्र बनाए रखेंगे।

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