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भारत का स्वदेशी ऐप्स का प्रचार, Google, WhatsApp और Microsoft को चुनौती

मोदी सरकार और मंत्रियों की पहल से स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन वैश्विक ब्रांड्स की पकड़ को चुनौती देना आसान नहीं है।

भारत पर डोनाल्ड ट्रम्प का टैरिफ (प्रतीकात्मक तस्वीर) / REUTERS/Dado Ruvic/Illustration

भारत में अमेरिकी ब्रांड्स के बढ़ते प्रभाव और अमेरिका द्वारा भारतीय आयात पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के तीन कैबिनेट सहयोगी 'Made in India' ऐप्स को बढ़ावा दे रहे हैं। यह कदम स्वदेशी उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करने का सबसे मजबूत संकेत माना जा रहा है।

ज़ोहो और मैपमाईइंडिया का प्रयोग
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल ही में हाईवे प्रोजेक्ट्स की प्रस्तुति में Microsoft PowerPoint का उपयोग नहीं किया और Zoho का सहारा लिया। उन्होंने मीडिया को बताया, मैप Google Maps का नहीं, MapmyIndia का है। सुंदर दिख रहा है, है न? स्वदेशी। वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर Zoho सॉफ्टवेयर का परीक्षण वीडियो भी साझा किया, जो 6.2 मिलियन बार देखा गया।

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अरत्ताई ऐप को प्रमोशन
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने Arattai नामक मैसेजिंग ऐप को बढ़ावा दिया। Arattai ने पिछले महीने 4 लाख से ज्यादा डाउनलोड दर्ज किए, जबकि अगस्त में यह संख्या 10,000 से कम थी। इसके दैनिक सक्रिय उपयोगकर्ता 26 सितंबर को 100,000 पार कर गए। गोयल ने लिखा, Arattai पर होना गर्व की बात है, यह Made In India मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म भारत को करीब लाता है।

वैश्विक ब्रांड्स को चुनौती आसान नहीं
अमेरिकी ब्रांड्स भारत में लाखों लोगों के लिए आकर्षक और भरोसेमंद विकल्प बने हुए हैं। सरकारी और निजी कार्यालय Microsoft का उपयोग करते हैं, यात्रा के लिए Google Maps और संवाद के लिए WhatsApp प्रमुख हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ सरकारी समर्थन से स्वदेशी ब्रांड सफल नहीं होंगे। उन्हें वित्तीय ताकत, अलग पहचान और निगरानी से सुरक्षा जैसी चुनौतियों का सामना करना होगा।

2021 में X-जैसे प्लेटफ़ॉर्म Koo को भी बढ़ावा मिला था, लेकिन वित्तीय और संचालन संबंधी चुनौतियों के कारण यह बंद हो गया। 

 

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