भारतीय झंडा / Image - Unsplash
भारत सरकार ने विदेशी पेशेवरों को देश में लाने की प्रक्रिया को आसान बनाते हुए वीजा नियमों में बड़ा सुधार किया है। इसका मकसद घरेलू कंपनियों को उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों के लिए आवश्यक विदेशी विशेषज्ञों को तेजी से लाने में मदद करना है और देश में कारोबार करने की सुविधा को बेहतर बनाना है।
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग यानी DPIIT ने 17 दिसंबर को बताया कि उसने नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) पर एक नया ऑनलाइन मॉड्यूल शुरू किया है। इसके जरिए भारतीय कंपनियां अब e-प्रोडक्शन इन्वेस्टमेंट बिज़नेस वीजा (e-B-4 Visa) के तहत विदेशी पेशेवरों के लिए डिजिटल रूप से स्पॉन्सरशिप लेटर जारी कर सकेंगी।
DPIIT के अनुसार यह पहल बिजनेस वीजा व्यवस्था के तहत किए जा रहे व्यापक सुधारों का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत में निवेश और उत्पादन को सुगम बनाना है। यह डिजिटल सुविधा प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना से जुड़ी कंपनियों के साथ-साथ गैर-PLI कंपनियों के लिए भी उपलब्ध होगी।
यह सुधार अगस्त 2025 में गृह मंत्रालय द्वारा जारी उस सर्कुलर के बाद आया है, जिसमें रोजगार वीजा, बिजनेस वीजा और पहले से चल रहे e-PLI बिज़नेस वीजा से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की बात कही गई थी। संशोधित ढांचे के तहत कुछ ऐसी गतिविधियां, जो पहले रोजगार वीजा के अंतर्गत आती थीं, अब बिजनेस वीजा श्रेणी में शामिल कर दी गई हैं।
इनमें सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट के तहत मशीनरी की इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग, भारतीय कंपनियों द्वारा फीस या रॉयल्टी के बदले कराई जाने वाली सेवाएं जैसे कार्य शामिल हैं। इसके साथ ही बिजनेस वीजा के अंतर्गत एक नई उपश्रेणी “प्रोडक्शन इन्वेस्टमेंट वीजा” (B-4 Visa) शुरू की गई है।
यह वीजा विदेशी विषय विशेषज्ञों, इंजीनियरों और तकनीकी कर्मियों के लिए बनाया गया है जो भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों में काम करते हैं। इसमें मशीनरी की स्थापना, गुणवत्ता जांच, आवश्यक रखरखाव, उत्पादन सहायता, आईटी और ईआरपी सिस्टम की शुरुआत, प्रशिक्षण, सप्लाई चेन विकास, प्लांट डिजाइन, संचालन की तैयारी और उत्पादन निवेश से जुड़े वरिष्ठ प्रबंधन की यात्राएं शामिल हैं।
सरकार ने अब e-PLI बिजनेस वीजा को समाप्त कर दिया है और वीजा मैनुअल 2019 के संबंधित अध्यायों में संशोधन किया गया है ताकि नई नीति के अनुरूप प्रक्रिया लागू की जा सके। DPIIT ने स्पष्ट किया कि प्रोडक्शन इन्वेस्टमेंट वीजा ई-वीजा के रूप में जारी किया जाएगा और इसके लिए आवेदन सरकारी ई-वीजा पोर्टल के माध्यम से ही किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत भारतीय कंपनियों को NSWS प्लेटफॉर्म के जरिए डिजिटल स्पॉन्सरशिप लेटर तैयार करना होगा। इस प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए फॉर्म छोटे किए गए हैं और संबंधित मंत्रालयों से सिफारिश लेने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। कंपनी से जुड़ा डेटा अब अपने आप कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय और जीएसटी नेटवर्क जैसे मौजूदा डेटाबेस से लिया जाएगा, जिससे अलग-अलग मंजूरियों की जरूरत नहीं रहेगी।
एक बार स्पॉन्सरशिप लेटर जारी होने के बाद उसमें एक विशिष्ट पहचान संख्या होगी, जिसे विदेशी पेशेवर को ई-वीजा के लिए आवेदन करते समय दर्ज करना होगा। NSWS मॉड्यूल को ई-वीजा पोर्टल से तकनीकी रूप से जोड़ दिया गया है, जिससे पूरी प्रक्रिया डिजिटल और तेज हो गई है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, पहले की वीजा प्रक्रिया काफी जटिल और समय लेने वाली थी जिसमें कई स्तरों की मंजूरी लगती थी। इससे विदेशी विशेषज्ञों के आने में देरी होती थी और आयातित मशीनरी तथा तकनीक के संचालन में बाधाएं आती थीं। नई व्यवस्था से इन समस्याओं को काफी हद तक दूर करने की उम्मीद है।
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