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इंटरनेशनल सोलर अलायंस को भारत का समर्थन, अमेरिका बाहर

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए यह जानकारी सामने आई है कि अमेरिका ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस समेत 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलने का फैसला किया है। ISA के वर्तमान में 125 सदस्य देश हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों / IANS/PIB

भारत ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के बाहर होने के बावजूद इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) को उसका समर्थन जारी रहेगा। ISA उन 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों में शामिल है, जिनसे अमेरिका ने गुरुवार को खुद को अलग करने का ऐलान किया है।

सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए यह जानकारी सामने आई है कि अमेरिका ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस समेत 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलने का फैसला किया है। ISA के वर्तमान में 125 सदस्य देश हैं।

अधिकारी के अनुसार, इंटरनेशनल सोलर अलायंस अपने मूल उद्देश्य पर पूरी तरह केंद्रित है, जिसका लक्ष्य सदस्य देशों को सौर ऊर्जा के विस्तार से जुड़ी साझा चुनौतियों से निपटने में सहयोग देना है, ताकि उनकी जरूरतों के अनुरूप सार्वभौमिक ऊर्जा पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

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सरकारी बयान में कहा गया है कि ISA आगे भी सदस्य देशों के साथ काम करता रहेगा, खासकर कम विकसित देशों (LDCs) और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों (SIDS) के साथ। इसमें सौर ऊर्जा के विकास और तैनाती, वित्तीय संसाधन जुटाने, क्षमता निर्माण और जोखिम की धारणा को कम करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों, एजेंसियों और आयोगों को अमेरिकी समर्थन निलंबित करने का फैसला लिया। यह निर्णय उनकी सरकार द्वारा संयुक्त राष्ट्र से जुड़े संगठनों समेत सभी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में अमेरिका की भागीदारी और फंडिंग की समीक्षा के बाद लिया गया।

ट्रम्प प्रशासन पहले ही संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) और जलवायु परिवर्तन से जुड़े अन्य संगठनों से दूरी बना चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि अमेरिका न केवल दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, बल्कि सबसे बड़ा प्रदूषक भी है।

UNFCCC वर्ष 1992 में 198 देशों के बीच हुआ एक समझौता है, जिसके तहत विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। यही समझौता पेरिस जलवायु समझौते की आधारशिला भी है। डोनाल्ड ट्रम्प जलवायु परिवर्तन को पहले भी “एक धोखा” बता चुके हैं और वे तेल जैसे जीवाश्म ईंधनों के उत्पादन बढ़ाने के पक्षधर रहे हैं।

ISA के अलावा, जिन संगठनों से अमेरिका बाहर होगा, उनमें कार्बन फ्री एनर्जी कॉम्पैक्ट, यूनाइटेड नेशंस यूनिवर्सिटी, इंटरनेशनल कॉटन एडवाइजरी कमेटी, इंटरनेशनल ट्रॉपिकल टिम्बर ऑर्गनाइजेशन, पार्टनरशिप फॉर अटलांटिक कोऑपरेशन, पैन-अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर जियोग्राफी एंड हिस्ट्री, इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ आर्ट्स काउंसिल्स एंड कल्चर एजेंसिज़ और इंटरनेशनल लीड एंड जिंक स्टडी ग्रुप शामिल हैं।

इसके अलावा, ट्रम्प प्रशासन ने यूएन पॉपुलेशन फंड (UNFPA) से भी खुद को अलग कर लिया है। यह एजेंसी दुनिया भर में यौन और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती है। ट्रम्प ने इस एजेंसी पर चीन जैसे देशों में “जबरन गर्भपात की प्रथाओं” में शामिल होने का आरोप लगाया है।

सरकार ने दोहराया है कि भारत जलवायु परिवर्तन और स्वच्छ ऊर्जा के वैश्विक प्रयासों में अपनी भूमिका निभाता रहेगा और इंटरनेशनल सोलर अलायंस के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाता रहेगा।

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