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ओलंपिक में भारतः चाहत सर्वश्रेष्ठ की लेकिन सांत्वना पदकों से ही संतुष्ट, आखिर कमी कहां

भाला फेंक में भारत के पास नीरज चोपड़ा के रूप में विश्व चैंपियन थे, लेकिन इस बार वह भी चूक गए। उन्होंने ये खिताब पड़ोसी पाकिस्तान के हाथों गंवा दिया। एक ऐसा देश जो आंतरिक संघर्ष से बेहाल है, जिसकी अर्थव्यवस्था बिखर चुकी है और वहां के लोग जिंदा रहने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।

पेरिस ओलंपिक में गए भारतीय दल से बुधवार को मूलाकात में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनके प्रयासों की सराहना की। / X @rashtrapatibhvn

140 करोड़ लोगों का भारत देश जो खुद को दुनिया की आर्थिक शक्ति होने का दावा करता है, 2024 के पेरिस ओलंपिक खेल में एक भी विश्व चैंपियन नहीं दे पाया और बिना गोल्ड मेडल के ही अपना अभियान खत्म करने पर विवश हो गया। 

भारत खेलों में विश्व चैंपियन तैयार क्यों नहीं कर पा रहा है? यह लाख टके का सवाल है जिसका जवाब देने में देश या तो देना नहीं चाहता या फिर जवाब देने से ही इनकार कर दे रहा है।

पेरिस ओलंपिक में भारत के खाते में एक रजत और पांच कांस्य पदक सहित कुल छह पदक आए हैं। इस तरह वह 2020 के तोक्यो ओलंपिक्स में देश की उपलब्धियों की बराबरी करने में भी नाकाम रहा है। पिछले चार वर्षों में भारत ने अपना एकमात्र विश्व चैंपियन खिताब भी खो दिया।

भाला फेंक में हमारे पास नीरज चोपड़ा के रूप में विश्व चैंपियन थे, लेकिन इस बार वह भी चूक गए। उन्होंने ये खिताब पड़ोसी देश पाकिस्तान के हाथों गंवा दिया। एक ऐसा देश आंतरिक संघर्ष से बेहाल है, जिसकी अर्थव्यवस्था बिखर चुकी है और वहां के लोग जिंदा रहने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं।

भारत ने 117 सदस्यीय टीम भेजी थी जबकि पाकिस्तानी दल में केवल सात खिलाड़ी और स्टाफ शामिल थे। इसमें से केवल दो- भाला फेंक के नए ओलंपिक चैंपियन नदीम अशरफ और उनके कोच को ही पाकिस्तान के खेल नियंत्रण बोर्ड ने वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई थी।

भारत की आबादी 140 करोड़ से ज्यादा है। उसके कई राज्य दुनिया के कई देशों से भी बड़े हैं। उत्तर प्रदेश में तो लगभग 20 करोड़ लोग रहते हैं। भारत के मुकाबले पाकिस्तान बहुत छोटा मुल्क है लेकिन फिर भी 23 करोड़ मिलियन से अधिक आबादी के साथ दुनिया का पांचवां सबसे अधिक आबादी वाला देश है। भौगोलिक रूप से देखें तो भारत पाकिस्तान से करीब चार गुना बड़ा है।

आजादी के बाद से भारत की पांच टीमों ने हॉकी का स्वर्ण पदक जीता है। आखिरी बार 1980 में मास्को में यह पदक उसके खाते में आया था जबकि पाकिस्तान तीन बार जीत चुका है। भारत ने ओलंपिक खेलों में केवल दो व्यक्तिगत स्वर्ण जीते हैं। पहला पदक निशानेबाजी में अभिनव बिंद्रा ने 2008 के बीजिंग ओलंपिक में दिलाया था और दूसरा पदक टोक्यो ओलंपिक में एथलीट नीरज चोपड़ा के भाले से मिला था।

एशिया के कई अन्य देश भारत से काफी आगे हैं। पेरिस ओलंपिक में चीन 40 स्वर्ण पदकों के साथ अमेरिका के साथ शीर्ष स्थान पर है। जापान और कोरिया खेल की दुनिया में दूसरी एशियाई महाशक्तियां हैं। वे खेल की दुनिया के शीर्ष आठ देशों में शामिल हैं।

इनके अलावा ईरान, चीनी ताइपे, हांगकांग, चीन, फिलीपींस और इंडोनेशिया ने हाल ही में हुए ओलंपिक में दो-दो स्वर्ण पदक जीते हैं। इजराइल, थाईलैंड और पाकिस्तान जैसे देशों ने भी स्वर्ण पदक के साथ पदक तालिका में ऊंची जगह बनाई।

भारत इस बात से खुद को सांत्वना दे सकता है कि पेरिस गए उसके 117 खिलाड़ियों में से 21 गले में पदक लेकर लौटे हैं। इनमें से कांस्य 16 पदक हॉकी से और तीन निशानेबाजी से आए। भारत को कुश्ती में एकमात्र कांस्य पदक मिला है। नीरज चोपड़ा ने भारत के रजत दिलाया।

भारत को सांत्वना पदकों के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। उसके खाते में कांस्य और कभी-कभी रजत ही आए हैं। शायद स्वर्ण पदक जीतने की इच्छा या क्षमता की कमी है। शायद एक सच्चे खेल राष्ट्र के रूप में भारत सोना दूसरों के लिए रखता है और खुद रजत और कांस्य से संतुष्ट हो जाता है।
 

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