राइस / AI
भारत में चावल संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा है। सुबह की खिचड़ी हो या दोपहर का सादा भात, चावल हर उम्र के लोगों के खाने में शामिल रहता है। लेकिन, जैसे ही वजन बढ़ने की बात आती है, सबसे पहले लोग चावल को ही थाली से हटाते हैं। आयुर्वेद में चावल को सात्विक आहार माना गया है। यह शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है और मन को शांत रखता है।
पुराने समय में चावल रोज खाया जाता था, लेकिन तब चावल कम प्रोसेस्ड होते थे। वहीं विज्ञान का कहना है कि चावल में फाइबर और प्राकृतिक तत्व होते हैं, जो वजन को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं।
ब्राउन राइस:- ब्राउन राइस में चावल की ऊपरी परत मौजूद रहती है, जिसमें फाइबर, विटामिन बी और मिनरल्स भरपूर होते हैं। जब हम ब्राउन राइस खाते हैं तो यह धीरे-धीरे पचता है। इससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती। विज्ञान में इसे लो ग्लाइसेमिक लोड कहा जाता है। यह ब्लड शुगर को नहीं बढ़ाता और न ही शरीर में फैट के रूप में जमा होता है। यह एनर्जी को बढ़ाता है।
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रेड राइस:- रेड राइस वजन कंट्रोल करने में मददगार माना जाता है। इसका लाल रंग इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स की वजह से होता है। ये तत्व शरीर में सूजन को कम करते हैं और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाते हैं। जब मेटाबॉलिज्म तेज होता है, तो शरीर जमा फैट को भी ऊर्जा की तरह इस्तेमाल करने लगता है। आयुर्वेद के अनुसार, रेड राइस रक्त को शुद्ध करने और शरीर की गर्मी को संतुलित रखने में सहायक है, जिससे वजन बढ़ने की संभावना कम होती है।
ब्लैक राइस:- आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ही नजरिए से ब्लैक राइस को खास माना जाता है। इसे फॉरबिडन राइस भी कहा जाता है, क्योंकि पुराने समय में यह सिर्फ खास लोगों के लिए रखा जाता था। ब्लैक राइस में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं, जो पेट को भरा रखते हैं। इससे कैलोरी कम होती है और वजन घटाने की प्रक्रिया तेज होती है।
बासमती राइस:- बासमती के दाने लंबे होते हैं और इसमें आम सफेद चावल की तुलना में ग्लाइसेमिक इंडेक्स थोड़ा कम होता है। यह शरीर में शुगर को धीरे रिलीज करता है। आयुर्वेद मानता है कि सही मात्रा में खाया गया सफेद चावल वजन नहीं बढ़ाता, लेकिन इसे दाल, सब्जी और सलाद के साथ लिया जाना चाहिए।
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