राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प। / X/@WhiteHouse
प्रमुख भारतीय अमेरिकी नीति संगठन फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (FIIDS) ने ट्रम्प प्रशासन से H-1B और H-4 वीजा आवेदकों के लिए विस्तारित सोशल मीडिया वेटिंग को अधिक संतुलित तरीके से लागू करने की अपील की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि इस नीति के कारण बड़े पैमाने पर वीजा अपॉइंटमेंट रद्द और देरी हो रही है, जिससे अमेरिकी उद्योग बाधित हो रहा है और हजारों उच्च कुशल भारतीय पेशेवर विदेश में फंस गए हैं।
FIIDS ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को लिखे पत्र में अमेरिकी विदेश विभाग की 15 दिसंबर 2025 से प्रभावी नई नीति का समर्थन किया, जिसमें सभी H-1B और H-4 आवेदकों की ऑनलाइन उपस्थिति और सोशल मीडिया की जांच अनिवार्य की गई है। संगठन ने इसे "राष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ाने का महत्वपूर्ण कदम" बताया, जो आवेदकों के डिजिटल फुटप्रिंट की गहन समीक्षा से संभावित जोखिमों की पहचान करता है।
हालांकि, FIIDS ने चिंता जताई कि इस नीति के कार्यान्वयन से दिसंबर 2025 के अपॉइंटमेंट मार्च 2026 या उससे बाद तक टल गए हैं, जिससे आवश्यक कर्मचारियों और अमेरिकी उद्योग को गंभीर बाधा पहुंच रही है। हजारों H-1B धारक छुट्टियों या वीजा नवीनीकरण के लिए विदेश यात्रा के बाद फंस गए हैं, जिनमें ज्यादातर भारतीय मूल के हैं। पत्र में उल्लेख है कि भारतीय पेशेवर H-1B अनुमोदनों के 70-75% हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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गूगल, ऐपल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी प्रमुख टेक कंपनियों ने कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय यात्रा से बचने की सलाह दी है, क्योंकि अनिश्चित देरी से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स प्रभावित हो रहे हैं। FIIDS ने चेताया कि लंबी बाधाएं AI, डेटा प्लेटफॉर्म्स और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में काम को खतरे में डाल रही हैं, जो अमेरिकी आर्थिक प्रतिस्पर्धा और नवाचार को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
संगठन ने स्पष्ट किया कि उसकी चिंताएं जांच को कम करने की नहीं, बल्कि अनावश्यक बाधाओं को रोकने की हैं। सुझाव दिए गए हैं कि पहले से निर्धारित अपॉइंटमेंट को रद्द न करें, बल्कि इंटरव्यू से पहले वेटिंग को प्राथमिकता दें और इंटरव्यू के बाद एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेसिंग को अधिकतम एक महीने तक सीमित रखें।
FIIDS ने कहा कि ये सुझाव प्रशासन के मजबूत इमिग्रेशन प्रवर्तन और कुशल पेशेवरों से संचालित नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था के लक्ष्यों से पूरी तरह मेल खाते हैं। H-1B वीजा कार्यक्रम अमेरिकी कंपनियों को विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों में विदेशी कर्मचारी नियुक्त करने की अनुमति देता है, जिसमें भारतीय पेशेवरों की प्रमुख भूमिका रही है।
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