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H-1B Visa: ट्रम्प के वीजा शुल्क में वृद्धि का असर, शेयर बाजार में गिरावट

यूएस में H-1B वीजा कार्यक्रम के तहत भारी शुल्क लगाने के बाद कुछ बड़ी तकनीकी कंपनियों और बैंकों ने कर्मचारियों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है।

 गूगल और माइक्रोसॉफ्ट का लोगो गूगल और माइक्रोसॉफ्ट का लोगो / Reuters

ट्रम्प सरकार की सख्त नीतियों का कई क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव दिख रहा है।  H-1B वीजा पर भारी शुल्क का निर्णय भी इन्हीं नीतियों में शामिल है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस सोमवार को अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई। इसकी मूल वजह लेबर कॉस्ट में वृद्धि और स्किल्ड श्रमिकों की कमी को लेकर चिंता मानी जा रही है। 

यूएस की सख्त आव्रजन और वीजा नीतियों का उद्देश्य अमेरिकियों को रोजगार और व्यवसाय के क्षेत्र में उनके अधिकारों की मजबूती सुरक्षित करना है। इस क्रम में एक और बड़ा फैसला लिया गया। जिसके तहत H-1B वीजा को लेकर भारी शुल्क की घोषणा की गई। 

दरअसल, ट्रम्प प्रशासन ने शुक्रवार को कहा कि वह कंपनियों से H-1B वर्किंग वीजा के लिए प्रति वर्ष $100,000 का भुगतान करने को कहेगा, जिसके बाद कुछ बड़ी तकनीकी कंपनियों और बैंकों ने कर्मचारियों को अमेरिका में ही रहने या तुरंत वापस लौटने की चेतावनी दी है।

हालांकि चिंताएं जरूर हैं, लेकिन मार्केट विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिकी बाजार पर इसका प्रभाव मध्यम होना चाहिए। इसकी वजह ये है कि वीजा शुल्क वृद्धि केवल नए आवेदनों पर ही लागू होगी। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका में कुशल श्रमिकों की सीमित आपूर्ति के कारण वेतन बढ़ सकता है। 

इस बीच कई दिग्गज कंपनियों ने अपने कर्मचारियों के ट्रैवेल एडवाइजरी जारी की है। इसमें माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न, अल्फाबेट और गोल्डमैन सैक्स जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। 

इन कंपनियों के शेयर गिरे
यूएस वीजा कार्यक्रम में बदवाल के बाद शेयर बाजार में उथल पुथल की मामूली शुरुआत देखी गई। कॉग्निजेंट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस, जेपी मॉर्गन और इंटेल, जो एच-1बी वीज़ा के सबसे बड़े प्रायोजकों में से हैं, के शेयर प्री-मार्केट ट्रेडिंग में 1.2% से 1.6% तक गिर गए।

भारतीय IT  शेयर में गिरावट
सोमवार को भारतीय आईटी शेयरों में गिरावट आई, तकनीकी उप-सूचकांक में लगभग 3% की गिरावट आई और व्यापक निफ्टी 50 सूचकांक में भी गिरावट आई।

विश्लेषकों ने क्या कहा?
जेफरीज के विश्लेषकों के मुताबिक, ट्रम्प सरकार का ताज निर्णय प्रतिभा को सीमित करन वाला है। उन्होंने रॉयटर्स से कहा,"H1-B वीजा शुल्क अमेरिका में प्रतिभाओं के आगमन को सीमित करने वाला है। यह स्थिति स्थानीय लोगों या ग्रीन कार्ड धारकों की मांग में वृद्दि करने वाली है। ऐसे में आईटी कंपनियों को इन कर्मचारियों को ज्यादा वेतन देना होगा, वरना उन्हें खोने का जोखिम उठाना पड़ेगा। प्रतिभाओं की कमी से ऑन-साइट वेतन में वृद्धि होगी, जिससे मुनाफ़े में 4-13% की गिरावट आ सकती है।"

रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा स्थिति को लेकर एम्बिट कैपिटल के विश्लेषकों के कहा, " मौजूदा स्थिति भारतीय आईटी कंपनियों के लिए नए H-1B वीजा लगभग बंद हो जाएंगे। क्योंकि वीजा शुल्क 1 लाख डॉलर उनकी वेतन वृद्धि से लगभग दोगुनी है।"

यह भी पढ़ें: ट्रम्प का H-1B शुल्क मौजूदा वीजा या रिन्यूअल पर असर नहीं डालेगा

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