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शांति शिखर सम्मेलन के उद्धाटन सत्र में हिस्सा लेंगी इला गांधी

इला महात्मा गांधी की पोती हैं और रंगभेद विरोधी कार्यकर्ता से दक्षिण अफ्रीकी राजनीतिज्ञ बनीं।

 इला गांधी इला गांधी / Wikimedia commons

महात्मा गांधी की पोती इला गांधी 29 अक्टूबर को 'पीस बिगिन्स एट होम' शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भाषण देंगी। सेंटर फॉर पार्टनरशिप सिस्टम्स (CPS) द्वारा आयोजित इस वर्चुअल शिखर सम्मेलन में 17 देशों के 26 वक्ता शामिल होंगे।

इला गांधी एक वैश्विक शांति कार्यकर्ता और दक्षिण अफ्रीका की पूर्व सांसद हैं। कम उम्र से ही रंगभेद विरोधी कार्यकर्ता रहीं इला गांधी को 1973 में राजनीतिक सक्रियता से प्रतिबंधित कर दिया गया था और कुल नौ वर्षों के लिए नजरबंद रखा गया था।

उन्होंने गांधी विकास ट्रस्ट की स्थापना की, जो अहिंसा को बढ़ावा देता है और महात्मा गांधी नमक मार्च समिति की संस्थापक सदस्य और अध्यक्ष थीं। 2002 में, उन्हें कम्युनिटी ऑफ क्राइस्ट इंटरनेशनल पीस अवार्ड से सम्मानित किया गया और 2007 में, दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी की विरासत को बढ़ावा देने के उनके कार्यों के लिए, उन्हें भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

आयोजकों के मुताबिक सांस्कृतिक इतिहासकार और सीपीएस संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. रियान आइस्लर के 'साझेदारी बनाम प्रभुत्व' ढांचे से प्रेरित होकर, शिखर सम्मेलन शांति को एक दूर के आदर्श के रूप में नहीं बल्कि एक प्रणालीगत चुनौती के रूप में परिभाषित करेगा, जो वहां से शुरू होती है जहां हम रहते हैं, प्यार करते हैं, और एक-दूसरे का पालन-पोषण करते हैं। यानी घर से।

डॉ. आइस्लर का ढांचा सहयोग, समानता और देखभाल को प्राथमिकता देने वाले समाजों और पदानुक्रम, नियंत्रण और हिंसा पर आधारित समाजों के बीच तुलना करता है, जिससे सांस्कृतिक विकास का विश्लेषण करने का एक नजरिया मिलता है।

शिखर सम्मेलन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. आइस्लर ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन केवल हिंसा को समाप्त करने के बारे में नहीं है। यह परिवारों से लेकर राष्ट्रों तक की व्यवस्थाओं की पुनर्कल्पना के बारे में है। जहां प्रभुत्व नहीं, बल्कि साझेदारी हमारे संबंधों को परिभाषित करती है। डॉ. रियान आइस्लर सेंटर फॉर पार्टनरशिप सिस्टम्स के अध्यक्ष और संस्थापक हैं।

इस दिन युद्ध और संघर्ष तथा प्रकृति और पर्यावरण जैसे विषयों पर प्रकाश डाला जाएगा और व्यावहारिक, वास्तविक दुनिया की पहलों पर प्रकाश डाला जाएगा जिन्हें वैश्विक स्तर पर अपनाया जा सकता है।

गांधी के अलावा, संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव, राजदूत अनवारुल के. चौधरी भी इस कार्यक्रम में अपनी बात रखेंगे। 

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